अकोला महानगरपालिका (सौजन्य-नवभारत) 
अकोला

50 खोके..एकदम ओके! अकोला महानगरपालिका में मचा बवाल, बिना प्रस्ताव 16 पार्षदों के निलंबन पर उठा सवाल

Akola Municipal Corporation: अकोला मनपा में 16 पार्षदों का निलंबन बना विवाद। विपक्ष ने आयुक्त को सौंपा निवेदन, कार्रवाई को बताया अवैध और पक्षपाती। जानें पूरा मामला।

प्रिया जैस

Akola Illegal Suspension: अकोला महानगरपालिका की महापौर शारदा खेडकर ने अनुशासन भंग के मामले में 16 पार्षदों को तीन सभाओं के लिए निलंबित करने का आदेश दिया। इस कार्रवाई को विपक्षी दलों ने पूरी तरह अवैध और लोकतांत्रिक परंपराओं के विपरीत बताया है। विरोधी पार्टी के नेताओं ने मनपा आयुक्त डा. सुनील लहाने से भेट कर इस विषय पर कानूनी चर्चा की और निवेदन प्रस्तुत किया।

मनपा आयुक्त ने इस पर सोमवार को निर्णय देने का आश्वासन दिया है। वंचित बहुजन आघाड़ी के स्वीकृत सदस्य सुनील ईन्नाणी ने जैसे ही सभागृह में बोलना शुरू किया, कुछ सदस्यों ने ‘50 खोके..एकदम ओके...’ जैसी घोषणाएं दीं। इसके बाद ईन्नाणी को अन्य विषयों पर बोलने का अवसर नहीं दिया गया। इस पर मनपा की बजट आमसभा में तीव्र वाद-विवाद हुआ।

16 पार्षदों को निलंबन

विरोधी पार्टी के पार्षदों ने इस घटना के विरोध में बैठा आंदोलन शुरू किया, जिससे सभागृह का वातावरण और अधिक तनावपूर्ण हो गया। अंततः महापौर ने पुलिस और सुरक्षा रक्षकों को बुलाकर आंदोलनरत पार्षदों को बाहर निकालने का आदेश दिया। इसके बाद अनुशासन भंग का हवाला देते हुए 16 पार्षदों पर निलंबन की कार्रवाई की गई। उल्लेखनीय है कि इस निलंबन में सुनील ईन्नाणी को शामिल नहीं किया गया।

30 मार्च को हुई बैठक में महापौर ने बिना किसी प्रस्ताव के सभागृह के समक्ष रखे और बिना बहुमत की मंजूरी लिए सीधे 16 पार्षदों को तीन बैठकों के लिए निलंबित करने का आदेश दिया। विपक्ष का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह नियमावली के विरुद्ध है। विरोधी सदस्य केवल शांतिपूर्ण तरीके से गांधीगिरी के मार्ग पर चलते हुए असंवैधानिक नारों का विरोध कर रहे थे और माफी की मांग कर रहे थे।

उन्होंने कोई हंगामा या कामकाज बाधित करने का प्रयास नहीं किया। इस घटना का आधिकारिक वीडियो भी उपलब्ध है, जिसमें स्पष्ट रूप से दिखता है कि कोई ठराव पारित नहीं हुआ और संबंधित पार्षदों को स्पष्टीकरण का अवसर भी नहीं दिया गया।

सत्ताधारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं?

विरोधी पार्टी ने यह भी सवाल उठाया कि जिस कारण से निलंबन की कार्रवाई की गई, उसी प्रकार की घोषणाबाजी बाद में सत्ताधारी गुट के सदस्य भी करते रहे, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इससे यह निलंबन पक्षपाती और अन्यायपूर्ण प्रतीत होता है। सभागृह का संचालन करते समय नियम और प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है, लेकिन इस मामले में उसे पूरी तरह दरकिनार किया गया।

विरोधी पार्टी ने मांग की है कि 16 पार्षदों का निलंबन तुरंत रद्द किया जाए, इस प्रकरण की स्वतंत्र जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए और भविष्य में ऐसी नियमबाह्य कार्रवाई न हो इसके लिए स्पष्ट मार्गदर्शक सूचना जारी की जाए। अन्यथा, न्याय न मिलने पर संबंधित सदस्य नागपुर उच्च न्यायालय में न्याय की मांग करने के लिए बाध्य होंगे। इस आशय का निवेदन मनपा आयुक्त, नगर सचिव तथा नगर विकास मंत्रालय को सौंपा गया है।

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