High Court का महावितरण को झटका, कहा- बिना मौका दिए बिजली काटना मनमानी; 21 लाख का लगाया था जुर्माना

High Court: बॉम्बे हाई कोर्ट ने महावितरण को दिया झटका! बिना सुनवाई का मौका दिए बिजली काटना गलत। ₹21 लाख के बिजली चोरी मामले में कनेक्शन तुरंत बहाल करने का आदेश।
Bombay High Court Deals a Blow to Mahavitaran! Disconnecting Power Without Granting a Hearing Is Wrong. Court Orders Immediate Restoration of Connection in ₹21 Lakh Electricity Theft Case.
हाई कोर्ट (फाइल फोटो)
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Nagpur High Court Bench: नागपुर में बिजली चोरी का आरोप लगाते हुए केवल 2 दिनों के भीतर सुनवाई का मौका दिए बिना ही बिजली काटी जाने को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई। याचिका पर सुनवाई के बाद न्यायाधीश अनिल किलोर और न्यायाधीश राज वाकोडे ने बिजली चोरी के आरोप में बिना पर्याप्त समय दिए कनेक्शन काटने की कार्रवाई को प्रथम दृष्टया मनमाना करार दिया।

कोर्ट ने महाराष्ट्र राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड (एमएसईडीसीएल) और अन्य प्रतिवादियों को बिजली कनेक्शन तत्काल प्रभाव से बहाल करने का अंतरिम आदेश दिया। राजन श्रीनिवास वियानावार की रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश जारी किया गया। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता नीरव पड़िया ने पैरवी की।

21 लाख का ठोका जुर्माना

याचिकाकर्ता के अनुसार, 27 मार्च 2026 को कुछ अधिकारियों ने कांद्री स्थित उनके प्रतिष्ठानों का दौरा किया था। अधिकारियों ने 39,175 यूनिट की बिजली चोरी का आरोप लगाते हुए 21,38,330 रुपये का असेसमेंट बिल तैयार किया। याचिकाकर्ता का दावा है कि यह बिल उन्हें 30 मार्च 2026 को दिया गया और अगले ही दिन (31 मार्च को) उनकी बिजली काट दी गई।

याचिकाकर्ता के मुताबिक उन्होंने 10% राशि के चेक के साथ अपना आवेदन संबंधित अधिकारी को सौंपने का प्रयास किया था, लेकिन उसे स्वीकार नहीं किया गया और उन्हें 1 अप्रैल को आने के लिए कहा गया।

हालांकि, उससे पहले ही कनेक्शन काट दिया गया। इन परिस्थितियों के मद्देनजर हाई कोर्ट ने बिजली काटने की कार्रवाई में हस्तक्षेप करते हुए एमएसईडीसीएल को याचिकाकर्ता के प्रतिष्ठानों की बिजली तुरंत बहाल करने का निर्देश दिया। अदालत ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब दायर करने के आदेश भी दिए।

हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी

अदालत ने दस्तावेजों का अवलोकन करने के बाद पाया कि बिल जारी होने (27 मार्च 2026) और बिजली काटे जाने के बीच महज 3 दिन का अंतर था, जिसमें शनिवार और रविवार की छुट्टियां भी शामिल थीं। पीठ ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता को बिल का भुगतान करने या कथित बिजली चोरी को लेकर अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर ही नहीं दिया गया।

हाई कोर्ट ने कहा कि हालांकि बिजली अधिनियम, 2003 की धारा 135(1-ए) आपूर्तिकर्ता को चोरी पकड़े जाने पर तुरंत बिजली काटने का अधिकार देती है, लेकिन इस मामले में असेसिंग ऑफिसर द्वारा धारा 126 के तहत कोई अंतिम असेसमेंट आदेश पारित नहीं किया गया था। अदालत ने कहा कि इस तरह अचानक बिजली काटने से याचिकाकर्ता और उनके कर्मचारियों के 'आजीविका कमाने के अधिकार' को छीना गया।

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