किंखेड बांध निर्माण (सोर्सः सोशल मीडिया)
अकोला

अकोला में जलसंकट दूर करने के लिए किंखेड में बांध निर्माण शुरू, किसानों को मिलेगी राहत

Kinkhed Dam Construction: अकोला में कम बारिश से बढ़ते जलसंकट के बीच किंखेड गांव में नदी पात्र पर मिट्टी के बांध का निर्माण शुरू हुआ है। इससे किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिलने की उम्मीद है।

आंचल लोखंडे

Akola Dam Project: अकोला जिले में वर्ष 2026 के दौरान सामान्य से कम वर्षा होने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में जलसंकट की स्थिति उत्पन्न हो गई है। अनेक गांवों में भूजल स्तर घटने और जल स्त्रोतों के सूखने से किसानों तथा ग्रामीण नागरिकों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इसी समस्या को देखते हुए नैराड, वैराट, धामना, गोपालखेड और गांधीग्राम सहित आसपास के गांवों के नागरिकों ने नदी-नालों पर बांध निर्माण कर जलसंचयन की व्यवस्था करने की मांग उठाई थी। ग्रामीणों की इस मांग को गंभीरता से लेते हुए सांसद अनूप धोत्रे ने आवश्यक पहल की।

उन्होंने 22 सितंबर 2026 को अकोला सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता को पत्र भेजकर संबंधित क्षेत्र में जलसंकट दूर करने के लिए तत्काल बांध निर्माण की मांग की थी। सांसद ने अपने पत्र में बताया था कि लगातार कम वर्षा के कारण क्षेत्र में पेयजल और सिंचाई जल की समस्या गहराने लगी है, इसलिए वर्षा जल को संरक्षित करने के लिए नदी और नालों पर अस्थायी तथा स्थायी उपाय किए जाने आवश्यक हैं।

देखरेख में कार्य युद्धस्तर

सांसद के लगातार किए गए प्रयासों और विभागीय स्तर पर की गई कार्रवाई के बाद अब किंखेड गांव में बांध निर्माण कार्य को प्रत्यक्ष रूप से प्रारंभ कर दिया गया है। बुधवार 7 अक्टूबर 2026 को शाम लगभग 5.49 बजे किंखेड क्षेत्र में नदी पात्र में मिट्टी का बांध निर्माण कार्य शुरू होने की पुष्टि हुई। निर्माण कार्य के लिए टाटा हिताची पोकलेन मशीन का उपयोग किया जा रहा है और संबंधित विभाग की देखरेख में कार्य युद्धस्तर पर आगे बढ़ाया जा रहा है।

क्षेत्र में भूजल स्तर बढ़ाने में मिलेगी बड़ी मदद

स्थानीय नागरिकों और किसानों ने बांध निर्माण शुरू होने पर संतोष व्यक्त किया है। उनका कहना है कि यदि यह कार्य समय पर पूरा हो जाता है तो क्षेत्र में भूजल स्तर बढ़ाने में बड़ी मदद मिलेगी। साथ ही आगामी रबी सीजन में किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध हो सकेगा। वर्तमान में जिले के अनेक क्षेत्रों में कुएं, बोरवेल और छोटे जल स्रोत सूखने की स्थिति में हैं, ऐसे में यह बांध किसानों के लिए राहत का महत्वपूर्ण माध्यम साबित हो सकता है।

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार नदी-नालों पर बनाए जाने वाले ऐसे बांध वर्षा जल को रोकने और उसे भूमि में समाहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इससे भूजल पुनर्भरण होता है और आसपास के क्षेत्रों में जल उपलब्धता बढ़ती है। विशेष रूप से सूखाग्रस्त परिस्थितियों में ऐसे कार्य किसानों के लिए अत्यंत उपयोगी साबित होते हैं।

लंबित मांग को मिली गति

ग्रामीणों ने सांसद अनूप धोत्रे का आभार व्यक्ता करते हुए कहा कि उनके प्रयासों के कारण लंबे समय से लंबित मांग को गति मिली है। किसानों को उम्मीद है कि बांध निर्माण पूर्ण होने के बाद खेती के लिए पानी की उपलब्धता में सुधार होगा तथा क्षेत्र में जलसंकट की समस्या काफी हद तक कम हो सकेगी।

स्थानीय प्रशासन का कहना है कि निर्माण कार्य को निर्धारित समयसीमा में पूरा करने का प्रयासा किया जा रहा है, ताकि आगामी रबी फसलों के लिए किसानों को अधिकतम लाभ मिल सके। जिले में सूखे की चुनौती के बीच इस परियोजना को जलसंवर्धन और कृषि, कृषि हित की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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