Akola Drought: राज्य सरकार द्वारा सूखा घोषित किए जाने के महज 48 घंटे के भीतर 2 किसानों ने मौत को गले लगा लिया। पहली घटना में मुर्तिजापुर तहसील के गाजीपुर में 45 वर्षीय किसान पुत्र सतीश पातोंड ने आत्महत्या कर ली। पातोंड ने अपने घर में जहरीली दवा का सेवन कर लिया था।
हालत गंभीर होने पर उन्हें उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। सतीश अपने पिता के साथ खेती के काम में हाथ बंटाकर परिवार के भरण-पोषण में सहयोग करता था। लगातार फसल खराब होने, खेती पर बढ़ते कर्ज और इस वर्ष की गंभीर सूखे की स्थिति के कारण परिवार आर्थिक संकट में था।
जानकारी के अनुसार, सतीश के नाम पर खेती के लिए बैंक का करीब 1 लाख 35 हजार रु. का कर्ज था। सतीश के परिवार में मां, पिता, पत्नी और दो बच्चे हैं। वह हरिभाऊ पातोंड का इकलौता पुत्र था। ऐसे में वृद्ध माता-पिता, पत्नी और दो बच्चों का सहारा छिन जाने से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
जिले में सूखा घोषित होने के एक दिन बाद बार्शीटाकली तहसील के सिंदखेड़ मोरेश्वर में एक किसान की कीटनाशक सेवन के बाद उपचार के दौरान मौत हो गई। मृतक किसान का नाम देविदास सोलंके (65) है। जानकारी के अनुसार, सोलंके के पास 2 एकड़ जमीन थी। उन्होंने शनिवार को खेत में कीटनाशक का सेवन कर लिया था, उन्हें उपचार के लिए सर्वोपचार अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
रविवार को उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। बताया गया कि देविदास सौलके पर कर्ज था। शुरुआती बुवाई में सोयाचीन नहीं उगने के कारण उन्हें दोबारा कर्ज लेकर बुवाई करनी पड़ी। इसके बाद पर्याप्त बारिश नहीं होने से फसल प्रभावित हुई। फसल उगने के बाद भी फलियां नहीं लगने और करीब 2 महीने तक बारिश नहीं होने से फसल सूख गई।
सरपंच के अनुसार, परिवार की आजीविका का खेती के अलावा कोई अन्य साधन नहीं था। उनके परिवार में पत्नी, 3 बेटियां और एक बेटा है, परिजनों और किसानों ने मांग की है कि सूखा घोषित होने के बावजूद किसानों को तत्काल सहायता नहीं मिली है। अन्य किसानों को ऐसी स्थिति से बचाने के लिए सूखा सहायता राशि शीघ्र किसानों के खातों में जमा की जाए।