Akola Drought Review Meeting Officer Lapse: महाराष्ट्र में बारिश की कमी और फसल संकट के बीच अकोला में सूखे जैसे हालात की समीक्षा बैठक के दौरान कुछ अधिकारियों के मोबाइल फोन में व्यस्त रहने का मामला सामने आया है। नांदेड़ की बैठक में काजू-बादाम परोसने के विवाद के बाद सामने आए इस मामले ने सरकारी बैठकों की गंभीरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
महाराष्ट्र में किसान बारिश की कमी और फसल संकट से परेशान हैं, वहीं सूखे जैसे हालात की समीक्षा के लिए हुई बैठक में कुछ अधिकारी मोबाइल फोन देखते नजर आए। अकोला में कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे की मौजूदगी में हुई बैठक के दौरान अधिकारियों के WhatsApp और Facebook देखने की तस्वीरें सामने आने के बाद लापरवाही पर सवाल उठ रहे हैं।
रविवार को अकोला में कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे की मौजूदगी में महाराष्ट्र के 8 जिलों और 56 तहसीलों में सूखे जैसे हालात की समीक्षा की गई। बैठक में खरीफ फसलों की स्थिति, बारिश की कमी, पानी की उपलब्धता और किसानों की समस्याओं पर चर्चा की जा रही थी। इसी दौरान कुछ अधिकारी अपने मोबाइल फोन में व्यस्त नजर आए।
बताया जा रहा है कि कुछ अधिकारी WhatsApp तो कुछ Facebook देखते दिखाई दिए। सूखे जैसे गंभीर मुद्दे पर चल रही बैठक में अधिकारियों का सोशल मीडिया पर व्यस्त रहना चर्चा का विषय बन गया। खासकर तब, जब इसके ठीक एक दिन पहले नांदेड़ की सूखा समीक्षा बैठक में काजू-बादाम परोसे जाने को लेकर विवाद खड़ा हुआ था।
नांदेड़ में कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे की अध्यक्षता में मराठवाड़ा के आठ जिलों की सूखा स्थिति की समीक्षा बैठक हुई थी। इस दौरान ड्राईफ्रूट परोसे जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया था। वीडियो में परभणी के सांसद संजय जाधव काजू-बादाम खाते दिखाई दिए।
मामले पर राजनीतिक विवाद भी हुआ। शिवसेना (यूबीटी) नेता अंबादास दानवे ने सरकार और सत्ताधारी जनप्रतिनिधियों पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि किसान संकट में हैं, जबकि सूखे की समीक्षा करने वाले लोग काजू-बादाम खाने में व्यस्त हैं।
संजय जाधव ने बाद में कहा था कि ड्राईफ्रूट उन्होंने नहीं मंगाए थे और बैठक में अधिकारियों की ओर से इसकी व्यवस्था की गई थी। विवाद बढ़ने के बाद कृषि मंत्री भरणे ने कहा कि भविष्य में सूखे से संबंधित बैठकों में केवल चाय और पानी परोसा जाएगा।
मराठवाड़ा और विदर्भ के कई इलाकों में बारिश की कमी के कारण खरीफ फसलों पर संकट गहराने की बात सामने आ रही है। किसान सरकारी सहायता और फसल नुकसान के आकलन की उम्मीद लगाए बैठे हैं। ऐसे में समीक्षा बैठक में अधिकारियों के मोबाइल इस्तेमाल का मामला सामने आने से बैठकों की गंभीरता और प्रशासनिक संवेदनशीलता पर सवाल उठ रहे हैं।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी संवेदनशील मुद्दों से जुड़ी बैठकों में खान-पान की व्यवस्था करते समय अधिक सावधानी बरतने की सलाह दी है। अब अकोला की बैठक में मोबाइल इस्तेमाल का मामला सामने आने के बाद अधिकारियों की कार्यशैली को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है।