अकोला जिले में सूखे से 4.26 लाख हेक्टेयर फसल प्रभावित होने की जानकारी।
अगस्त में 13 और सितंबर में 11 किसानों की आत्महत्या का दावा।
इस साल अब तक 120 किसान आत्महत्याओं का आंकड़ा सामने आया।
बारिश के लंबे अंतराल से सोयाबीन, कपास और अन्य खरीफ फसलों को नुकसान।
किसान संगठनों ने घोषणाओं के बजाय वास्तविक आर्थिक राहत देने की मांग की।
Akola 4.26 Lakh Hectare Kharif Crop Loss Dry Spell: अकोला जिले में बारिश के लंबे अंतराल और सूखे के कारण करीब 4.26 लाख हेक्टेयर क्षेत्र की फसलें प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अगस्त और सितंबर में 24 किसानों ने आत्महत्या की, जबकि इस साल अब तक जिले में यह संख्या 120 बताई गई है। किसान संगठनों ने प्रभावित परिवारों को तत्काल आर्थिक सहायता और स्थायी राहत उपाय देने की मांग की है।
अकोला, बारिश में लंबे अंतराल और सूखे की बढ़ती तीव्रता ने अकोला जिले के किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। खरीफ सीजन में फसलों को हुए नुकसान के साथ अब पानी और चारे की समस्या भी गंभीर होने लगी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जिले में करीब 4.26 लाख हेक्टेयर क्षेत्र की फसलें प्रभावित हुई हैं। आर्थिक संकट के बीच किसानों को सरकार से तत्काल सहायता मिलने की उम्मीद है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अगस्त में 13 और सितंबर में 11 किसानों ने आत्महत्या की। इस तरह दो महीनों में कुल 24 किसानों की आत्महत्या की जानकारी सामने आई है। इस साल अब तक जिले में किसान आत्महत्याओं का आंकड़ा 120 बताया गया है।
किसानों की स्थिति को लेकर चिंता बढ़ रही है। हालांकि, इन घटनाओं के कारणों और आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है; हर घटना को केवल सूखे या फसल नुकसान से जोड़कर देखना उचित नहीं होगा।
इस वर्ष की खरीफ सीजन शुरुआत से ही किसानों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। कपास के पसंदीदा बीज हासिल करने के लिए किसानों को भागदौड़ करनी पड़ी, जबकि सोयाबीन के बीजों की गुणवत्ता को लेकर भी शिकायतें सामने आईं।
जुलाई में कुछ क्षेत्रों में अतिवृष्टि से फसलों को नुकसान पहुंचा। इसके बाद अगस्त और सितंबर में बारिश का लंबा अंतराल रहा, जिससे सोयाबीन की फसल सूखने लगी। कपास और अन्य फसलों पर भी प्रतिकूल असर पड़ा। फसल उत्पादन घटने की आशंका से किसानों की आमदनी पर दबाव बढ़ गया है।
पिछले वर्ष बाढ़ और अतिवृष्टि से हुए नुकसान के बाद राज्य सरकार ने 31,628 करोड़ रुपये के सहायता पैकेज की घोषणा की थी। किसान संगठन के अध्यक्ष ललित बहाले ने दावा किया था कि इस पैकेज में केंद्र सरकार की सहायता और ग्रामीण बुनियादी सुविधाओं पर होने वाले खर्च को भी शामिल किया गया था। उनके अनुसार, किसानों को प्रत्यक्ष रूप से मिलने वाली राशि इससे काफी कम थी।
अब सूखे से प्रभावित किसानों को भी केवल सहायता की घोषणाओं के बजाय वास्तविक आर्थिक मदद की प्रतीक्षा है। किसानों की मांग है कि नुकसान का आकलन कर समय पर सहायता उपलब्ध कराई जाए।
किसानों को संकट से बाहर निकालने के लिए आर्थिक सहायता के साथ पानी की उपलब्धता, सिंचाई व्यवस्था, चारा और खेती के जोखिम कम करने वाले दीर्घकालीन उपायों पर भी ध्यान देना जरूरी है। फिलहाल किसानों की निगाहें सरकार के राहत संबंधी फैसलों और प्रभावित क्षेत्रों के लिए उठाए जाने वाले कदमों पर टिकी हैं।