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महाराष्ट्र शासन की स्वायत्त संस्था अमृत, पुणे की ओर से छत्रपति शिवाजी महाराज की ऐतिहासिक विरासत और स्वराज्य के विचारों को प्रोत्साहित करने के लिए यह अभियान चलाया जा रहा है।
नागरिकों, परिवारों, विद्यार्थियों, स्कूलों, महाविद्यालयों, सामाजिक संस्थाओं और युवा मंडलों से अभियान में शामिल होने का आग्रह किया गया है।
इच्छुक प्रतिभागियों को स्वयं किले की प्रतिकृति तैयार करनी होगी। किसी दूसरे स्रोत से प्राप्त प्रतिकृति या फोटो स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
Akola Amrut Durgotsav Campaign: छत्रपति शिवाजी महाराज ने सूखे जैसी संकटपूर्ण परिस्थितियों में प्रजा को सहारा देने और स्वराज्य को सशक्त बनाने के लिए दूरदर्शिता के साथ अनेक उपाय किए थे। प्रजा का हित, आत्मनिर्भरता और स्वराज्य की स्थापना जैसे उनके विचार आज भी समाज के लिए प्रेरणादायी हैं।
इन्हीं विचारों को नमन करने तथा महाराष्ट्र के गौरवशाली इतिहास से नई पीढ़ी को जोड़ने के उद्देश्य से महाराष्ट्र शासन की स्वायत्त संस्था महाराष्ट्र अनुसंधान, उन्नति एवं प्रशिक्षण प्रबोधिनी (अमृत), पुणे की ओर से 'अमृत दुर्गोत्सव 2026' अभियान चलाया जा रहा है। अमृत संस्था ने अकोला जिले के अधिक से अधिक नागरिकों से इस अभियान में उत्साहपूर्वक भाग लेने की अपील की है।
इस अभियान में अकोला जिले के नागरिकों, परिवारों, विद्यार्थियों, स्कूलों, महाविद्यालयों, सामाजिक संस्थाओं और युवा मंडलों से सक्रिय भागीदारी की अपील की गई है। इच्छुक प्रतिभागियों को स्वयं दुर्ग की प्रतिकृति तैयार करनी होगी। इसके बाद अपनी बनाई हुई प्रतिकृति के साथ खींचा गया छायाचित्र अभियान की आधिकारिक वेबसाइट https://www.amrutdurgot-sav.com पर अपलोड करना होगा। छायाचित्र में प्रतिभागी और उसके द्वारा बनाई गई दुर्ग प्रतिकृति स्पष्ट रूप से दिखाई देना आवश्यक है। अन्य स्थानों से प्राप्त अथवा किसी दूसरे स्रोत से लिए गए छायाचित्र स्वीकार नहीं किए जाएंगे। इसलिए प्रतिभागियों को स्वयं दुर्ग प्रतिकृति बनाकर उसके साथ अपना छायाचित्र प्रस्तुत करना होगा।
यह अभियान केवल मिट्टी से दुर्ग की प्रतिकृति बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रजा के हितों को सर्वोपरि रखने वाले छत्रपति शिवाजी महाराज के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने, स्वराज्य के विचारों को नमन करने और नई पीढ़ी में ऐतिहासिक विरासत के प्रति
दीपावली के अवसर पर दुर्ग की प्रतिकृतियां बनाने की परंपरा को प्रोत्साहित करना इस पहल का प्रमुख उद्देश्य है। इसके माध्यम से महाराष्ट्र के ऐतिहासिक गढ़ों और किलों की गौरवशाली विरासत के प्रति अभिमान पैदा करने के साथ ही उनके संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।