Ahilyanagar Mahayuti Politics News: अहिल्यानगर जिले में दिवंगत पूर्व विधायक अरुणकाका जगताप के निधन के बाद पिछले साढ़े तीन वर्षों से खाली पड़ी विधान परिषद की स्थानीय स्वशासन संस्था सीट के लिए आखिरकार चुनाव की घोषणा कर दी गई है। इस चुनाव को लेकर राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। खास बात यह है कि इस सीट पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) ने अपना दावा मजबूत किया है, जिससे उम्मीदवार चयन को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है।
इस सीट के लिए मतदान 18 जून को होगा, जबकि नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 1 जून निर्धारित की गई है। इस चुनाव में जिले की नगर पालिकाओं, नगर पंचायतों और नगर निगम के पार्षद मतदान करेंगे। यह सीट वर्ष 2022 से खाली पड़ी है। दिवंगत पूर्व विधायक अरुणकाका जगताप उस समय सेवानिवृत्त हुए थे। उस दौरान जिला परिषद और पंचायत समिति के सदस्य मौजूद थे, लेकिन अधिकांश नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों के चुनाव नहीं हुए थे। इसी कारण पर्याप्त मतदाता संख्या नहीं होने से चुनाव टल गया था।
अब जिले में 12 नगर पालिकाओं, नगर पंचायतों और नगर निगमों के चुनाव पूरे हो चुके हैं, जबकि तीन नगर पंचायतों में पहले से ही निर्वाचित सदस्य कार्यरत हैं। लगभग 82 प्रतिशत मतदाता उपलब्ध होने के कारण अब चुनाव की प्रक्रिया शुरू की गई है। जिले में कुल 18 स्थानीय स्वशासन संस्थाओं के 569 सदस्य इस चुनाव में मतदाता हैं। इनमें नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतों के निर्वाचित सदस्य शामिल हैं। हालांकि जिला परिषद और पंचायत समिति की कुछ सीटें अभी भी रिक्त हैं।
डॉ. सुजय विखे पाटिल का नाम भी संभावित उम्मीदवारों में चर्चा में है। हालांकि यह सीट फिलहाल अजित पवार गुट के पास मानी जा रही है, इसलिए BJP को यहां कितना अवसर मिलेगा, यह देखना दिलचस्प होगा।
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राहुरी विधानसभा उपचुनाव के बाद पूर्व मंत्री प्राजक्ता तनपुरे और महायुति के बीच बढ़ती नजदीकियों की चर्चा है। हालांकि तनपुरे ने स्पष्ट किया है कि वह अब भी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) में ही हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि उन्हें उम्मीदवारी चाहिए, तो उन्हें महायुति के किसी घटक दल में शामिल होना पड़ सकता है।
पूर्व विधायक चंद्रशेखर घुले पाटिल को अजित पवार गुट का मजबूत दावेदार माना जा रहा है। हालांकि विधानसभा चुनाव के दौरान उनकी बगावत को लेकर BJP के भीतर संशय बना हुआ है। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि महायुति उनके नाम पर सहमति बनाती है या नहीं।