चादर में गर्भवति महिला को ले जाते ग्रामीण (फोटो सोर्स- नवभारत) 
उमरिया

उमरिया में प्रसव पीड़ा से तड़पती महिला को चादर में उठाकर सड़क तक लाए ग्रामीण, महिलाओं ने रोड पर रोप दिया धान

Umaria Road Issue: बैगा बहुल देवरा गांव में खराब सड़क के कारण गर्भवती महिला को चादर में उठाकर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ा। वायरल वीडियो ने ग्रामीण विकास और स्वास्थ्य सुविधाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्रीतेश जैन

Umaria Pregnant Woman Viral Video : उमरिया जिले से विकास के दावों पर सवाल खड़े करने वाली एक तस्वीर सामने आई है। जिले की बैगा बहुल ग्राम पंचायत देवरा में प्रसव पीड़ा से तड़प रही गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचाने के लिए परिजनों और ग्रामीणों को चादर के सहारे उठाकर गांव से मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ा। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और ग्रामीण क्षेत्रों की बदहाल बुनियादी सुविधाओं को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

जानकारी के मुताबिक ग्राम पंचायत देवरा की एक गर्भवती महिला को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुई। परिजनों ने तुरंत 108 एम्बुलेंस सेवा को सूचना दी, लेकिन लगातार बारिश के कारण गांव तक जाने वाला रास्ता पूरी तरह कीचड़ में तब्दील हो चुका था। सड़क की खराब स्थिति के चलते एम्बुलेंस गांव के भीतर नहीं पहुंच सकी। मजबूरी में ग्रामीणों और परिजनों ने महिला को चादर के सहारे उठाकर कई सौ मीटर पैदल मुख्य सड़क और नेशनल हाईवे तक पहुंचाया, जहां पहले से खड़ी एम्बुलेंस ने उसे अस्पताल पहुंचाया।

बुनियादी सुविधाओं की खुली पोल

अस्पताल में चिकित्सकों की निगरानी में महिला ने सुरक्षित रूप से एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। मां और नवजात दोनों स्वस्थ बताए जा रहे हैं। हालांकि इस पूरी घटना ने दूरस्थ आदिवासी इलाकों में सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं की वास्तविक स्थिति उजागर कर दी है।

ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन

घटना के बाद गांव की महिलाओं ने खराब सड़क के विरोध में अनोखा प्रदर्शन किया। महिलाओं ने जर्जर सड़क पर ही धान की रोपाई कर प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई। उनका कहना था कि सड़क की हालत इतनी खराब है कि यह सड़क कम और खेत ज्यादा नजर आती है। बारिश के मौसम में गांव का संपर्क लगभग टूट जाता है, जिससे मरीजों, गर्भवती महिलाओं और स्कूली बच्चों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ती है।

ग्रामीणों का प्रदर्शन

मरीजों को कंधे पर उठाकर ले जाना पड़ता है

ग्रामीणों का कहना है कि प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत करोड़ों रुपये की लागत से सड़क निर्माण स्वीकृत हुआ था, लेकिन निर्माण कार्य की धीमी गति और लापरवाही के कारण आज भी लोग कीचड़ भरे रास्तों पर चलने को मजबूर हैं। उनका कहना है कि यदि सड़क समय पर बन गई होती तो एम्बुलेंस सीधे गांव तक पहुंच जाती और गर्भवती महिला को इस तरह कंधों पर उठाकर नहीं ले जाना पड़ता।

वायरल वीडियो से उठे कई सवाल

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद लोग सरकार के ग्रामीण विकास और स्वास्थ्य सेवाओं के दावों पर सवाल उठा रहे हैं। यह घटना केवल एक गांव की नहीं, बल्कि उन दूरस्थ क्षेत्रों की तस्वीर है जहां आज भी अधूरी सड़कें और बुनियादी सुविधाओं का अभाव लोगों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।

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