Bandhavgarh Tiger Reserve News: बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की पनपथा रेंज में रविवार तड़के एक दर्दनाक घटना सामने आई, जहां वन विभाग की रेस्क्यू कार्रवाई के दौरान एक नर बाघ की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, रविवार सुबह करीब 3 से 6 बजे के बीच बाघ जंगल से भटककर खेरवाटोला गांव पहुंच गया था। इसी दौरान उसने एक परिवार पर हमला कर दिया, जिसमें फूलबाई पाल नामक महिला की मौके पर मौत हो गई, जबकि परिवार के चार अन्य सदस्य गंभीर रूप से घायल हो गए।
घटना के बाद बाघ मृतका के शव के पास करीब छह घंटे तक बैठा रहा। गांव में दहशत फैलने के बाद ग्रामीणों ने वन विभाग को सूचना दी। इसके बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और बाघ को काबू में करने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए दो हाथियों को भी मौके पर बुलाया गया। काफी मशक्कत के बाद वन अमले ने बाघ को ट्रेंकुलाइज किया, लेकिन कुछ ही देर बाद बाघ की मौत हो गई।
वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि बाघ की मौत ट्रेंकुलाइजेशन के दौरान दी गई दवा के ओवरडोज या समय पर एंटीडोज नहीं मिलने की वजह से हो सकती है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि मौत की वास्तविक वजह पोस्टमार्टम और हिस्टोपैथोलॉजिकल जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
प्रदेश की पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ समीता राजौरा ने बताया कि बाघ का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है और जांच के बाद ही स्थिति साफ होगी। वहीं घटना से नाराज ग्रामीणों ने वन विभाग के कर्मचारियों पर हमला कर दिया, जिसमें कई वनकर्मी घायल हो गए। मौके पर तनावपूर्ण स्थिति बनी रही।
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घटना पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने दुख व्यक्त करते हुए मृतका के परिजनों को 25 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने और घायलों के मुफ्त इलाज की घोषणा की है। इस घटना ने एक बार फिर मानव और वन्यजीव संघर्ष की गंभीर चुनौती को उजागर कर दिया है।