हर्षा रिछारिया पहुंची उज्जैन (सोर्स- नवभारत लाइव)
उज्जैन

उज्जैन मंदिर विवाद में साध्वी हर्षा रिछारिया की एंट्री, प्रशासन को दिया 2 दिन का अल्टीमेटम; दी अनशन की चेतावनी

Khade Hanuman Temple Ujjain: उज्जैन खड़े हनुमान मंदिर विवाद में साध्वी हर्षानंद गिरि की हुंकार, मंदिर पहुंचकर किया पूजन-अर्चन, प्रशासन को दिया 2 दिन का अल्टीमेटम।

अजय नीमा, सजल रघुवंशी

Sadhvi Harsha Richaia Ultimatum: उज्जैन के प्राचीन खड़े हनुमान मंदिर को लेकर जारी विवाद के बीच गुरुवार को साध्वी हर्षानंद गिरि उर्फ हर्षा रिछारिया मंदिर पहुंचीं। उन्होंने विधि-विधान से भगवान खड़े हनुमान का पूजन-अर्चन किया और मंदिर से जुड़े विवाद पर अपनी स्पष्ट राय रखी।

उन्होंने कहा कि वे विकास कार्यों के विरोध में नहीं हैं, लेकिन धार्मिक आस्था और परंपराओं का सम्मान भी उतना ही आवश्यक है। मंदिर परिसर में पूजा के बाद उन्होंने सरकार और प्रशासन से संवेदनशील समाधान निकालने की अपील की।

बाबा से मांगी शक्ति, कहा- जरूरत पड़ी तो आवाज उठाऊंगी

पूजन के बाद मीडिया से चर्चा करते हुए साध्वी हर्षानंद गिरि ने कहा कि खड़े हनुमान बाबा अपने भक्तों को बिना मांगे भी बहुत कुछ प्रदान करते हैं। उन्होंने भगवान से प्रार्थना की कि उन्हें इतनी शक्ति और साहस मिले कि आवश्यकता पड़ने पर वे पूरी श्रद्धा और निष्ठा के साथ बाबा के लिए अपनी आवाज बुलंद कर सकें। उन्होंने कहा कि यह केवल एक मंदिर का विषय नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा मामला है।

सड़क चौड़ीकरण का समर्थन, मंदिर यथास्थान रखने की मांग

साध्वी हर्षानंद गिरि ने स्पष्ट किया कि सिंहस्थ 2028 को लेकर हो रहे विकास कार्य और सड़क चौड़ीकरण आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि उज्जैन का विकास होना चाहिए और सरकार इस दिशा में अच्छा काम कर रही है। हालांकि उनका मानना है कि विकास और आस्था दोनों को साथ लेकर चलना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि सड़क चौड़ीकरण के साथ मंदिर को यथास्थान रखते हुए उसके बेहतर स्वरूप में पुनर्निर्माण का रास्ता निकाला जा सकता है। उन्होंने प्रतिमा को हटाने के लिए किए जा रहे प्रयासों पर भी चिंता जताई और कहा कि अब आगे इस तरह की कोशिशें नहीं होनी चाहिए।

प्रशासन को दो दिन का अल्टीमेटम, आंदोलन की चेतावनी

साध्वी हर्षानंद गिरि ने कहा कि उन्होंने सरकार और प्रशासन को दो दिन का समय दिया है। इस दौरान प्रशासन को मंदिर पहुंचकर भगवान खड़े हनुमान से क्षमा याचना करनी चाहिए, विधिवत पूजन करना चाहिए और मंदिर के पुनर्निर्माण का संकल्प लेना चाहिए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि निर्धारित समय में सकारात्मक पहल नहीं हुई तो वे अनशन और धरना-प्रदर्शन का रास्ता अपनाएंगी। फिलहाल प्रशासन और श्रद्धालुओं के बीच सहमति बनाने की कोशिशें जारी हैं। ऐसे में अब सभी की नजर इस बात पर है कि सिंहस्थ 2028 की विकास योजनाओं और धार्मिक आस्था के बीच संतुलन कैसे स्थापित किया जाता है।

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