खड़े हनुमान मंदिर फोटो सोर्स- नवभारत
उज्जैन

सिंहस्थ चौड़ीकरण: 4 कोशिशों में टस से मस नहीं हुई 160 साल पुरानी हनुमान प्रतिमा, अब आर्कोलॉजिस्ट करेंगे जांच

Ujjain Singhastha 2028 : उज्जैन में सिंहस्थ के लिए सड़क चौड़ीकरण के दौरान 160 साल पुराने खड़े हनुमान मंदिर की प्रतिमा हटाने में निगम को चार बार कोशिश करनी पड़ी। अब आर्कोलॉजिस्ट जांच करेंगे।

अजय नीमा, प्रीतेश जैन

Ujjain Khade Hanuman Temple : उज्जैन में आगामी सिंहस्थ को देखते हुए शहर के आंतरिक मार्गों के चौड़ीकरण का काम तेजी से चल रहा है। इसी क्रम में नगर निगम कंठाल चौराहे से छत्री चौक तक मुख्य मार्ग का विस्तार कर रहा है। सड़क चौड़ीकरण की जद में आने वाले धार्मिक स्थलों को अन्य स्थानों पर स्थानांतरित किया जा रहा है। इसी दौरान मार्ग में स्थित करीब 160 वर्ष पुराने खड़े हनुमान मंदिर को हटाना निगम और प्रशासन के लिए चुनौती बन गया है।

गुरुवार को नगर निगम की टीम ने कार्रवाई करते हुए मंदिर के कुछ हिस्से को ध्वस्त कर दिया। इसके बाद भगवान हनुमान की प्रतिमा को फिलहाल टेंट के नीचे अस्थायी रूप से विराजित किया गया है। निगम की योजना प्रतिमा को टंकी चौक पर स्थापित करने की है, लेकिन प्रतिमा को मूल स्थान से हटाने की कोशिश सफल नहीं हो पाई।

चार बार कोशिश, फिर भी नहीं हिली प्रतिमा

जानकारी के मुताबिक, नगर निगम की टीम ने प्रतिमा को स्थानांतरित करने के लिए चार बार प्रयास किए, लेकिन प्रतिमा अपने स्थान से हिली तक नहीं। लगातार प्रयासों के बावजूद सफलता नहीं मिलने के बाद अब प्रशासन ने मामले में विशेषज्ञों की मदद लेने का फैसला किया है। प्रतिमा को लेकर स्थानीय लोगों में भी आस्था और भावनाओं का माहौल बना हुआ है।

स्थानीय लोगों ने सुनाई चमत्कारी घटनाओं की बात

प्रतिमा को हटाने के प्रयासों के बाद स्थानीय निवासियों में आक्रोश के साथ धार्मिक आस्था का माहौल भी देखने को मिल रहा है। क्षेत्रवासियों का दावा है कि भगवान हनुमान अपनी मूल जगह से हटना नहीं चाहते। स्थानीय लोगों ने पूर्व में प्रतिमा को हटाने के प्रयासों के दौरान आग और पानी गिरने जैसी घटनाएं होने की बात भी कही है।

अब आर्कोलॉजिस्ट करेंगे मंदिर और प्रतिमा की जांच

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अब पुरातत्व विशेषज्ञों यानी आर्कोलॉजिस्ट की टीम को बुलाया गया है। विशेषज्ञ प्रतिमा के नीचे की मिट्टी, मंदिर की संरचना और आसपास के क्षेत्र की अत्याधुनिक मशीनों से स्कैनिंग करेंगे। इसका उद्देश्य प्रतिमा और उसके आधार की स्थिति को समझना बताया जा रहा है।

रिपोर्ट आने के बाद होगा स्थानांतरण पर फैसला

प्रशासन के मुताबिक, आर्कोलॉजिस्ट की विस्तृत स्कैनिंग रिपोर्ट आने के बाद ही प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से स्थानांतरित करने की आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल प्रतिमा को अस्थायी रूप से टेंट के नीचे रखा गया है। सिंहस्थ 2028 से पहले सड़क चौड़ीकरण का काम पूरा करने की तैयारी के बीच अब विशेषज्ञों की रिपोर्ट पर सभी की नजरें टिकी हैं।

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