ग्वालियर नगर निगम में बड़ा फर्जीवाड़ा, संपत्ति की असली आईडी बदलकर बना दिया नया मालिक; 4 पर FIR दर्ज

Gwalior Property Fraud: ग्वालियर नगर निगम में बड़ा फर्जीवाड़ा बेनकाब, टैगोर नगर की संपत्ति की असली आईडी बदलकर बनाया गया फर्जी मालिक, फर्जी रसीद से करा दी रजिस्ट्री।
Gwalior property fraud Municipal Corporation property ID fraud
ग्वालियर नगर निगम(सोर्स- सोशल मीडिया)
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Gwalior Municipal Corporation Property Fraud Case: ग्वालियर नगर निगम के संपत्तिकर रिकॉर्ड में कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। आरोप है कि टैगोर नगर की एक संपत्ति की असली प्रॉपर्टी आईडी बदलकर दूसरी आईडी तैयार की गई और रिकॉर्ड में मालिक का नाम बदल दिया गया।

इसके बाद फर्जी संपत्तिकर रसीद के आधार पर संपत्ति की रजिस्ट्री भी करा दी गई। मामले में निलंबित और सेवानिवृत्त अधिकारी समेत चार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।

ई-नगरपालिका लॉग से सामने आया रिकॉर्ड में बदलाव

मामला वार्ड नंबर 30 की संपत्ति से जुड़ा है। शिकायतकर्ता सुरेश बनवानी के अनुसार मूल संपत्तिकर आईडी 1000255876 थी, जबकि कथित तौर पर दूसरी आईडी 1000107294 तैयार कर उसमें दूसरे व्यक्ति का नाम दर्ज किया गया। नगर निगम की जांच में ई-नगरपालिका की लॉग रिपोर्ट से पता चला कि 20 मार्च 2025 को संपत्ति के मालिक का नाम विजय पुत्र राजाराम पाल से बदलकर जयनारायण पुत्र स्वर्गीय उदय सिंह किया गया। इसी दौरान कॉलोनी का नाम भी बदला गया। 28 मार्च को निर्मित क्षेत्रफल में भी बदलाव किए जाने की बात सामने आई।

अधिकारियों की यूजर आईडी से हुआ बदलाव

जांच में रिकॉर्ड में बदलाव के दौरान तत्कालीन सहायक राजस्व निरीक्षक और कर संग्राहक नरेंद्र कुशवाह की यूजर आईडी तथा तत्कालीन एपीटीओ महेंद्र शर्मा की ईएनपी 1.0 यूजर आईडी के इस्तेमाल की जानकारी सामने आई। ग्वालियर शहर के निगम ने नरेंद्र कुशवाह को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। उनका जवाब 31 जुलाई 2026 को मिला, लेकिन निगम ने उसे संतोषजनक नहीं माना। नरेंद्र कुशवाह निलंबित हैं, जबकि महेंद्र शर्मा सेवानिवृत्त हो चुके हैं।

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फर्जी रसीद से बिक्री और रजिस्ट्री का आरोप

जांच के मुताबिक 15 मई 2025 को जयनारायण ने संपत्ति अशोक सिंह को बेच दी। रजिस्ट्री के लिए इस्तेमाल की गई संपत्तिकर रसीद को नगर निगम ने अपने कार्यालय से जारी होना नहीं पाया। निगम ने मूल रसीद, कथित फर्जी रसीद, लेजर, रजिस्ट्री, टीसी, आरआई रिपोर्ट और प्रमाणित लॉग फाइल पुलिस को सौंपी हैं। निगम की शिकायत पर विश्वविद्यालय थाना पुलिस ने जयनारायण, अशोक सिंह, नरेंद्र कुशवाह और महेंद्र शर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

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