Highlights :
उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर और परिसर के अन्य मंदिरों का 10.27 करोड़ रुपए से जीर्णोद्धार होगा।
उज्जैन विकास प्राधिकरण की देखरेख में कराए जाएंगे कार्य।
मंदिरों के साथ आरसीसी संरचनाओं की भी होगी मरम्मत।
Mahakaleshwar Temple Renovation : विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर और परिसर में स्थित अन्य मंदिरों के जीर्णोद्धार एवं मरम्मत पर 10.27 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। उज्जैन विकास प्राधिकरण की देखरेख में होने वाले इन कार्यों में मंदिरों के साथ आरसीसी संरचनाओं की मरम्मत भी शामिल है।
परियोजना का उद्देश्य मंदिर परिसर की संरचनात्मक मजबूती बढ़ाने और धार्मिक एवं ऐतिहासिक विरासत का संरक्षण करना है।
श्री महाकालेश्वर मंदिर और परिसर के अन्य मंदिरों की मौजूदा संरचनाओं को सुरक्षित बनाए रखने के लिए ये राशि निर्धारित की गई है। परियोजना के तहत आवश्यकतानुसार मरम्मत और सुधार कार्य किए जा रहे हैं। ताकि मंदिरों की मजबूती और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। इन कार्यों में संरचनाओं की मौजूदा स्थिति को ध्यान में रखते हुए जरूरी सुधार पर जोर रहेगा।
जीर्णोद्धार परियोजना को उज्जैन शहर विकास प्राधिकरण के माध्यम से आगे बढ़ाया जा रहा है। इसके लिए CBRI को प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट (PMC) एजेंसी और AAIC को निर्माण एजेंसी की जिम्मेदारी दी गई है। इन एजेंसियों के माध्यम से मरम्मत एवं जीर्णोद्धार संबंधी कार्य कराए जा रहे हैं। मंदिर परिसर की संरचनाओं के संरक्षण के लिहाज से तकनीकी निगरानी और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता महत्वपूर्ण होगी।
परियोजना में मंदिरों के जीर्णोद्धार के साथ आरसीसी संरचनाओं की मरम्मत भी की जाएगी। समय के साथ संरचनाओं में होने वाली टूट-फूट और अन्य समस्याओं को दूर करने के लिए जरूरी सुधार किए जाएंगे। इसका उद्देश्य संरचनाओं की मजबूती और सुरक्षा को बनाए रखना है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में अलग-अलग मंदिरों में होने वाले विशिष्ट कार्यों और उनकी समय-सीमा का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है।
श्री महाकालेश्वर मंदिर उज्जैन की प्रमुख धार्मिक पहचान है। यहां देशभर से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में मंदिर और परिसर में मौजूद अन्य संरचनाओं का नियमित रखरखाव महत्वपूर्ण है। ₹10.27 करोड़ की इस परियोजना के जरिए मंदिरों की सुरक्षा, संरचनात्मक मजबूती और दीर्घकालिक संरक्षण पर ध्यान दिया जा रहा है। जीर्णोद्धार कार्यों से धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व वाली संरचनाओं को सुरक्षित बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।