अक्षय आनंद पोस्ट (सोर्स- सोशल मीडिया) 
उज्जैन

महाकाल के दर पर VIP कल्चर हावी! अक्षय आनंद के गर्भगृह वाली सोशल मीडिया पोस्ट से छिड़ी बहस; जानें पूरा मामला

Akshay Anand Mahakal Garbhagriha Post: उज्जैन महाकाल मंदिर के गर्भगृह में दिल्ली के डिजिटल क्रिएटर द्वारा फोटो खिंचवाने पर विवाद, सांसद अनिल फिरोजिया ने वीआईपी कल्चर का विरोध कर जांच की मांग की।

सजल रघुवंशी

Mahakal Temple VIP Culture Controversy: उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर एक बार फिर गर्भगृह में प्रवेश को लेकर विवादों में घिर गया है। हाल ही में सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरें वायरल हुई हैं, जिनमें कुछ लोग मंदिर के गर्भगृह के भीतर दर्शन करते और फोटो खिंचवाते नजर आ रहे हैं।

बताया जा रहा है कि यह तस्वीरें 15 जून को सोमवती अमावस्या के दिन की हैं, जब मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी थी। तस्वीरों के सामने आने के बाद आम भक्तों के बीच नाराजगी देखी जा रही है और मंदिर में वीआईपी व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

सोशल मीडिया पोस्ट से बढ़ा विवाद

जानकारी के अनुसार दिल्ली निवासी डिजिटल क्रिएटर अक्षय आनंद ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर पत्नी और मित्रों के साथ गर्भगृह में खिंचवाई गई तस्वीरें साझा की थीं। जबकि महाकाल मंदिर परिसर में फोटोग्राफी और वीडियो रिकॉर्डिंग पर प्रतिबंध है। ऐसे में इन तस्वीरों के वायरल होने के बाद यह सवाल खड़ा हो गया कि आखिर विशेष लोगों को गर्भगृह तक पहुंच और फोटो खिंचवाने की अनुमति कैसे मिली। इस घटना ने आम श्रद्धालुओं और विशेष अतिथियों के बीच भेदभाव की बहस को फिर से हवा दे दी है।

सांसद अनिल फिरोजिया ने जताई आपत्ति

मामले पर उज्जैन सांसद अनिल फिरोजिया ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि महाकाल मंदिर में वीआईपी कल्चर हावी होता जा रहा है, जिसका वह लगातार विरोध करते रहे हैं। सांसद ने कहा कि वे स्वयं आज भी सामान्य श्रद्धालुओं की तरह लाइन में लगकर बाबा महाकाल के दर्शन करते हैं। उनका मानना है कि भगवान के दरबार में सभी भक्त समान हैं और किसी भी प्रकार का विशेषाधिकार नहीं होना चाहिए।

गर्भगृह आम श्रद्धालुओं के लिए खोलने की मांग

अनिल फिरोजिया ने प्रशासन से मांग की है कि महाकाल मंदिर के गर्भगृह को प्रतिदिन कम से कम दो घंटे के लिए आम श्रद्धालुओं के लिए खोला जाए, ताकि भक्त स्वयं जलाभिषेक और पूजन कर सकें। उन्होंने इस संबंध में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से भी अनुरोध किया है।

सांसद ने कहा कि हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुसार गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति का अधिकार जिला कलेक्टर के पास है, लेकिन व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिससे आम श्रद्धालुओं को भी समान अवसर मिल सके। अब इस मुद्दे पर श्रद्धालुओं की नजर प्रशासन और मंदिर समिति के अगले फैसले पर टिकी हुई है।

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