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मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के आष्टा गांव में माता रानी की नई प्रतिमा स्थापित नहीं करने की अनोखी धार्मिक मान्यता।
प्रतिमा स्थापना की कोशिशों के दौरान बाधाएं आने के बाद परंपरा बंद कर दी गई।
आष्टा में तेरहवीं सदी के प्राचीन मंदिरों के अवशेष मौजूद हैं। जो हिमांद पंथी स्थापत्य शैली के लिए प्रसिद्ध हैं।
मंदिर के पीछे उत्तर दिशा की ओर मुख किए मां काली की दस भुजाओं वाली काले पत्थर की प्रतिमा विराजमान है।
Mata Rani Temple Seoni : सिवनी जिले के आष्टा गांव में माता रानी की नई प्रतिमा स्थापित नहीं करने की अनोखी परंपरा है। स्थानीय लोगों के मुताबिक पहले कुछ बार प्रतिमा स्थापना की कोशिश की गई लेकिन हर बार कोई न कोई बाधा आ गई।
इसके बाद ग्रामीणों ने इसे मां काली की इच्छा मानते हुए प्रतिमा स्थापना नहीं करने की परंपरा अपना ली। यहां श्रद्धालु मंदिर में पहले से विराजमान मां काली की पूजा-अर्चना करते हैं।
आष्टा गांव में तेरहवीं सदी के आठ मंदिरों का समूह रहा है। जो क्षेत्र के ऐतिहासिक और स्थापत्य वैभव की कहानी कहता है। इन मंदिरों का निर्माण हिमांद पंथी शैली में किया गया था। मंदिरों में पत्थरों को विशेष तरीके से जोड़कर संरचनाएं बनाई गई थीं। आठ मंदिरों के कारण ही इस स्थान का नाम आष्टा पड़ने की मान्यता प्रचलित है। वर्तमान में इस जगह पर मंदिरों के अवशेष और एक मंडप दिखाई देते हैं।
स्थानीयों के अनुसार इन मंदिरों का निर्माण देवी मां के चमत्कार से एक ही रात में हुआ था। किसी व्यवधान के कारण निर्माण कार्य अधूरा रह गया और तराशे हुए पत्थर परिसर में ही रह गए। वहीं पुरातत्व विभाग के मुताबिक इन मंदिरों का निर्माण देवगिरि के यादव शासकों के समय मंत्री हिमांद्रि ने कराया था। ये मंदिर आज ऐतिहासिक धरोहर के रूप में महत्वपूर्ण हैं।
आष्टा के मंदिर में गर्भगृह खाली है। जबकि मंदिर के पीछे उत्तर दिशा की ओर मुख किए मां काली की दस भुजाओं वाली काले पत्थर की प्रतिमा स्थापित है। मंदिर की संरचना में पत्थरों को विशेष तकनीक से जोड़ने की झलक मिलती है। स्थानीय मान्यता के अनुसार वनवास के दौरान भगवान श्रीराम भी इस क्षेत्र में आए थे। मंदिर पुरातत्व विभाग की देखरेख में है।
सिवनी शहर के आष्टा में चैत्र और शारदीय नवरात्र के दौरान विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं। मंदिर परिसर में जवारे बोए जाते हैं और सैकड़ों महिलाएं व कन्याएं जवारों के साथ जुलूस में शामिल होती हैं। मंदिर से तालाब तक निकलने वाले जुलूस और जवारे विसर्जन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटते हैं। मां काली के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों से भी भक्त यहां पहुंचते हैं। आस्था, लोकमान्यताओं और प्राचीन स्थापत्य का संगम आष्टा को सिवनी जिले का विशिष्ट धार्मिक स्थल बनाता है।