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सीहोर जिले के भैरूंदा क्षेत्र में नर्मदा नदी से कथित अवैध रेत उत्खनन को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश।
ग्रामीणों ने अवैध उत्खनन पर रोक लगाने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
26 अक्टूबर 2026 को सुबह 11 बजे से बड़ी छिपानेर स्थित नर्मदा पुल के पास अनिश्चितकालीन धरना शुरू करने का ऐलान।
Narmada illegal Sand Mining Protest : सीहोर जिले के भैरूंदा क्षेत्र में नर्मदा नदी से कथित अवैध रेत उत्खनन और परिवहन को लेकर ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों का आक्रोश बढ़ गया है। ग्रामीणों ने प्रशासन पर निष्क्रियता और कथित मिलीभगत के आरोप लगाते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है।
इस मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति जनजाति युवा संघ (मध्य प्रदेश) ने भी मोर्चा खोल दिया है। संघ ने ऐलान किया है कि कार्रवाई नहीं होने पर 26 अक्टूबर 2026 से अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया जाएगा।
संघ के ऐलान के मुताबिक 26 अक्टूबर को सुबह 11 बजे से बड़ी छिपानेर स्थित नर्मदा पुल के पास अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया जाएगा। स्थानीय नागरिकों ने चेतावनी दी है कि समय रहते अवैध उत्खनन पर रोक नहीं लगी तो आंदोलन उग्र रूप ले सकता है। अब इस मामले में प्रशासन और खनिज विभाग की कार्रवाई पर नजर रहेगी।
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार भैरूंदा तहसील के बड़ी छिपानेर, रानीपुर, चौरसखेड़ी, सातदेव, टीगाली, नीलकंठ और सिलकंठ मंडी सहित आसपास के क्षेत्रों में नर्मदा नदी से बड़े पैमाने पर रेत निकाली जा रही है। आरोप है कि इन क्षेत्रों में एक भी रेत खदान वैध रूप से नीलाम नहीं हुई है इसके बावजूद नदी के भीतर पनडुब्बियों और तटों पर भारी-भरकम जेसीबी मशीनों की मदद से उत्खनन किया जा रहा है। ग्रामीणों ने इस गतिविधि पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।
ग्रामीणों और संगठनों का कहना है कि नर्मदा नदी में कथित अवैध रेत उत्खनन से पर्यावरण और जलीय जीवों को नुकसान पहुंच रहा है। इसके साथ ही शासन को करोड़ों रुपये के राजस्व की हानि होने का भी आरोप लगाया गया है। स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया है कि यदि इन क्षेत्रों में वैध खदानों की नीलामी नहीं हुई है तो बड़े पैमाने पर रेत का उत्खनन और परिवहन कैसे हो रहा है। उन्होंने संबंधित विभागों से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
इस पूरे मामले में स्थानीय लोगों और संगठनों ने युफोरिया माइंस लिमिटेड का नाम लेते हुए सीहोर जिले की सीमा में अवैध रेत उत्खनन किए जाने का आरोप लगाया है। दावा है कि दूसरे जिलों की रॉयल्टी पर्चियों का इस्तेमाल कर सीहोर जिले में रेत परिवहन को वैध दिखाया जा रहा है। खनिज विभाग और जिला प्रशासन के अधिकारियों की कथित मिलीभगत के आरोप भी लगाए गए हैं।
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति जनजाति युवा संघ के प्रदेश अध्यक्ष राहुल पवारे के नेतृत्व में प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर दोषियों और कथित रूप से संलिप्त अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन शुरू किया जाएगा।