

Chambal River Sand Mining Monitoring: मध्य प्रदेश के मुरैना में रेत के अवैध उत्खनन की आशंका के बीच प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है। रविवार को छुट्टी के दिन जिला टास्क फोर्स की टीम अचानक चंबल के घाटों पर पहुंची और कई घंटों तक निरीक्षण किया।
एसपी से लेकर डीएफओ और पुलिस-वन विभाग के अधिकारियों ने संवेदनशील घाटों का जायजा लिया। इस दौरान एसपी धर्मराज मीना ने खुद ड्रोन उड़ाकर घाटों और आसपास के इलाकों की निगरानी की। संदिग्ध रास्ते मिलने पर उन्हें जेसीबी से खुदवाकर बंद करा दिया गया।
जिला प्रशासन की टीम ने सबसे पहले रिठौरा के कुल्हाड़ा घाट और फिर गड़ौरा घाट का निरीक्षण किया। इसके बाद एसपी और डीएफओ पुलिस टीम के साथ राजघाट पहुंचे। अधिकारियों का निरीक्षण रात करीब पौने आठ बजे तक चला। ड्रोन के जरिए रेत के संभावित भंडारण और अवैध उत्खनन से जुड़े रास्तों की जानकारी जुटाई गई। कुछ स्थानों पर ऐसे रास्ते मिले, जिनका इस्तेमाल रेत माफिया के आने-जाने के लिए किए जाने की आशंका थी। इसके बाद तत्काल जेसीबी बुलाकर इन रास्तों को खुदवाकर बंद कराया गया।
अधिकारियों ने चंबल घाटों पर बनाई जा रही सुरक्षा चौकियों का भी निरीक्षण किया। यहां टेंट लगाकर 24 घंटे तैनात मध्य प्रदेश एसएएफ के सशस्त्र जवानों से एसपी ने बातचीत की और रेत माफिया से निपटने के तरीके बताए। एसपी ने फायरिंग जैसी स्थिति में पहले हवाई फायर करने की प्रक्रिया भी जवानों को समझाई। उनके मुताबिक जिले के 24 घाट संवेदनशील हैं, जहां चौकियां और निगरानी प्वाइंट बनाए जा रहे हैं। एसएएफ की दो कंपनियों के करीब 130 जवान पेट्रोलिंग कर रहे हैं।
डीएफओ एचसी बघेल के मुताबिक पिछले चार दिनों से लगातार औचक निरीक्षण किया जा रहा है। टीमें दिन और रात अलग-अलग घाटों पर पहुंचकर जांच कर रही हैं। अधिकारियों का दावा है कि अब तक किसी घाट पर अवैध रेत उत्खनन नहीं मिला है। बारिश का सीजन खत्म होने और फसल कटाई शुरू होने के साथ अवैध उत्खनन की आशंका बढ़ती है, इसलिए निगरानी बढ़ाई गई है।
राजघाट पर घड़ियाल और कछुओं के अंडे देने वाले स्थान होने के कारण विशेष निगरानी रखी जा रही है। कुल्हाड़ा घाट पर एआई टावर लगाया गया है, जो संदिग्ध गतिविधि होने पर मोबाइल फोन के जरिए सूचना देता है। वहीं चंबल के घाटों की निगरानी मजबूत करने के लिए 16 चेक पोस्ट बनाने का काम भी जारी है।