पेड़ों की अवैध कटाई (फोटो सोर्स- नवभारत) 
सीहोर

इछावर के लोटिया क्षेत्र में पेड़ों की अवैध कटाई, पेड़ काटने के बाद जमीन पर हो रहा कब्जा, वन विभाग पर उठे सवाल

Lotiya Forest Area : इछावर वन परिक्षेत्र के लोटिया क्षेत्र में अवैध पेड़ कटाई और वन भूमि पर कब्जों के आरोप लगे हैं। ग्रामीणों ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कार्रवाई की मांग की है।

प्रीतेश जैन

Sehore Forest Cutting: सीहोर जिले के इछावर वन परिक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले लोटिया क्षेत्र में अवैध रूप से पेड़ों की कटाई और वन भूमि पर कब्जों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि क्षेत्र में वन माफिया सक्रिय हैं और हरे-भरे पेड़ों की लगातार कटाई की जा रही है, जबकि वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारी इस पर प्रभावी कार्रवाई करने में नाकाम साबित हो रहे हैं।

ग्रामीणों के अनुसार, जंगलों से बड़ी संख्या में पेड़ काटे जा रहे हैं और उनकी लकड़ी को क्षेत्र से बाहर ले जाया जा रहा है। आरोप है कि यह सब वन विभाग की निगरानी व्यवस्था के बावजूद हो रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वनरक्षक और अन्य जिम्मेदार अधिकारी नियमित गश्त और निगरानी के दावों के बावजूद वन क्षेत्र में हो रही गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण नहीं रख पा रहे हैं।

पेड़ों की कटाई के बाद जमीन पर कब्जा

क्षेत्रवासियों का आरोप है कि वन माफिया पहले जंगलों में पेड़ों की कटाई करते हैं और उसके बाद खाली हुई भूमि पर धीरे-धीरे अवैध कब्जे जमाने का प्रयास करते हैं। इससे वन क्षेत्र का दायरा लगातार घट रहा है और पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो आने वाले समय में स्थिति और गंभीर हो सकती है।

वन विभाग पर भी उठे सवाल

वन विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायतें किए जाने के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं होती। इससे अवैध गतिविधियों में शामिल लोगों के हौसले बुलंद हो रहे हैं। स्थानीय लोगों ने वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग की है।

पेड़ों की कटाई से बिगड़ रहा पर्यावरण संतुलन

पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि जंगल केवल पेड़ों का समूह नहीं हैं, बल्कि वे जल संरक्षण, जैव विविधता और स्वच्छ वातावरण के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। लगातार हो रही कटाई से क्षेत्र का पर्यावरणीय संतुलन प्रभावित हो सकता है। साथ ही, वन्य जीवों के प्राकृतिक आवास पर भी खतरा बढ़ सकता है।

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