Highlights :
सीहोर के द एमराल्ड होटल में कोतवाली पुलिस की छापेमारी।
होटल के कमरे से 5 लोग जुआ खेलते पकड़े गए।
पुलिस ने 10 लाख 85 हजार रुपए और ताश के पत्ते जब्त किए।
Sehore Hotel Gambling Raid : सीहोर जिले में अवैध गतिविधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत कोतवाली पुलिस ने इंदौर भोपाल हाईवे स्थित एक होटल में जुए के फड़ पर छापा मारा। पुलिस ने द एमराल्ड होटल के एक कमरे से 5 लोगों को जुआ खेलते हुए पकड़ा। मौके से 10 लाख 85 हजार रुपए नकद और ताश के पत्ते जब्त किए गए।
हालांकि इस कार्रवाई के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। पुलिस ने कार्रवाई से जुड़ा प्रेस नोट और आरोपियों की तस्वीरें तो जारी कीं लेकिन किसी भी आरोपी का नाम और पहचान सार्वजनिक नहीं की।
पुलिस के मुताबिक 30 अक्टूबर 2026 को मुखबिर से सूचना मिली थी कि इंदौर भोपाल हाईवे स्थित द एमराल्ड होटल के एक कमरे में जुआ खेला जा रहा है। जानकारी के आधार पर कोतवाली पुलिस की टीम ने योजनाबद्ध तरीके से होटल में दबिश दी। कार्रवाई के दौरान 5 लोगों को जुआ खेलते हुए पकड़ा गया। तलाशी में 10,85,000 रुपए नकद और ताश के पत्ते बरामद किए गए। इस कार्रवाई में निरीक्षक गिरीश दुबे, प्रधान आरक्षक वीरेंद्र सिंह परमार, आरक्षक चेतन चौहान, आरक्षक कृष्णकांत एवं चालक विष्णु भगवान ठाकुर की सराहनीय भूमिका रही।
पुलिस ने पकड़े गए 5 आरोपियों के खिलाफ कोतवाली थाने में अपराध क्रमांक 820/26 दर्ज किया है। उनके विरुद्ध धारा 3/4 पब्लिक गैंबलिंग एक्ट के तहत प्रकरण कायम कर विवेचना शुरू कर दी गई है। ये कार्रवाई पुलिस अधीक्षक सोनाक्षी सक्सेना के निर्देश पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रशांत चौबे और नगर पुलिस अधीक्षक अभिनंदना शर्मा के मार्गदर्शन में की गई। कोतवाली थाना प्रभारी निरीक्षक गिरीश दुबे के नेतृत्व में पुलिस टीम ने कार्रवाई को अंजाम दिया।
इस कार्रवाई में सबसे ज्यादा चर्चा आरोपियों की पहचान सार्वजनिक नहीं किए जाने को लेकर हो रही है। एमपी पुलिस की ओर से जारी प्रेस नोट में पांच आरोपियों को पकड़े जाने और लाखों रुपए जब्त करने की जानकारी दी गई है। साथ ही आरोपियों की तस्वीरें भी साझा की गईं लेकिन तस्वीरें पीछे से ली गई थीं। प्रेस नोट में उनके नाम, पते और अन्य पहचान संबंधी जानकारी का उल्लेख नहीं किया गया।
सीहोर जिला पुलिस की आमतौर पर जारी होने वाली प्रेस विज्ञप्तियों में आरोपियों के नाम और पते का उल्लेख किया जाता रहा है। ऐसे में इस मामले में पहचान सार्वजनिक नहीं किए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आखिर इतनी बड़ी रकम के साथ पकड़े गए पांच लोगों के नाम उजागर क्यों नहीं किए गए? क्या इसके पीछे कोई प्रशासनिक कारण है या फिर किसी अन्य वजह से उनकी पहचान गोपनीय रखी गई है? फिलहाल पुलिस की ओर से नाम सार्वजनिक नहीं करने का कोई स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है।