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कार्बाइड गन से निकलने वाला धमाका आंखों, चेहरे और त्वचा को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।
कैल्शियम कार्बाइड और पानी की प्रतिक्रिया से ज्वलनशील एसीटिलीन गैस बनती है।
पिछले साल मध्य प्रदेश में ऐसी घटनाओं में सैकड़ों लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई थी।
दीपावली से पहले पुलिस बाजारों में व्यापारियों को जागरूक कर रही है।
मप्र में कार्बाइड गन के निर्माण और बिक्री पर प्रतिबंध है।
Carbide Gun Danger Safety Tips : दीपावली के दौरान तेज आवाज के लिए इस्तेमाल की जाने वाली कार्बाइड गन लोगों के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। पिछले साल मध्य प्रदेश में कार्बाइड गन फटने की घटनाओं में सैकड़ों लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई थी। इसके बावजूद सोशल मीडिया पर घर में ऐसी गन बनाने से जुड़ी जानकारी मौजूद है।
अब दीपावली से पहले पुलिस ने प्रतिबंधित कार्बाइड गन और कार्बाइड लैंप की बिक्री व भंडारण को लेकर व्यापारियों को जागरूक करना शुरू कर दिया है। पुलिस लोगों से भी इनके इस्तेमाल से बचने की अपील कर रही है।
कैल्शियम कार्बाइड गन एक अस्थायी उपकरण है जिसका इस्तेमाल तेज धमाके जैसी आवाज निकालने के लिए किया जाता है। इसमें कैल्शियम कार्बाइड की पानी के साथ रासायनिक प्रतिक्रिया से एसीटिलीन गैस बनती है। ये गैस अत्यधिक ज्वलनशील होती है और चिंगारी मिलने पर तेजी से जल सकती है। बंद जगह में गैस के कारण दबाव बढ़ने से विस्फोट भी हो सकता है। इस प्रक्रिया में उपकरण के हिस्से टूटकर बाहर निकल सकते हैं जिससे आसपास मौजूद लोगों को गंभीर चोट लगने का खतरा रहता है।
कार्बाइड गन को खिलौने या पटाखे के विकल्प के रूप में इस्तेमाल करना बेहद खतरनाक हो सकता है। इसके धमाके से आंखों, चेहरे और त्वचा पर गंभीर चोटें लग सकती हैं। प्लास्टिक या धातु के टुकड़े आंखों में घुसने से कॉर्निया को नुकसान पहुंच सकता है और कुछ मामलों में रोशनी भी जा सकती है। तेज धमाके से कानों को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है। वहीं गैस में आग लगने से जलने की घटनाएं भी हो सकती हैं। बच्चों के लिए इसका इस्तेमाल विशेष रूप से जोखिम भरा है।
कार्बाइड गन के इस्तेमाल से होने वाले हादसे प्रशासन की चिंता बढ़ा रहे हैं। जानकारी के मुताबिक वर्ष 2025 में मध्य प्रदेश के अलग-अलग शहरों में कार्बाइड गन के इस्तेमाल से 300 से अधिक लोग घायल हुए थे। इनमें ग्वालियर में 19 मामले सामने आए थे। इन मामलों में 18 लोगों की आंखों के कॉर्निया को चोट पहुंची थी। ऐसे हादसों को देखते हुए प्रशासन इस बार दीपावली से पहले प्रतिबंधित गनों के खिलाफ सख्ती बरत रहा है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देशों के बाद त्योहारी सीजन को देखते हुए सभी जिलों के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षकों कार्बाइड और पोटाश गन के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जा रहा है। प्रशासन का उद्देश्य दीपावली के दौरान इन गनों के इस्तेमाल से होने वाले हादसों को रोकना है।
कार्बाइड गन का इस्तेमाल लंबे समय से खेती में बंदरों, पक्षियों और दूसरे जंगली जानवरों को भगाने के लिए किया जाता रहा है। हालांकि दीपावली के दौरान तेज आवाज निकालने के लिए इसका इस्तेमाल चिंता बढ़ा रहा है। किसान हों या आम लोग इसके इस्तेमाल से दुर्घटना होने का खतरा बना रहता है।
पुलिस आयुक्त के आदेश के बाद शहर के प्रमुख बाजारों में पुलिस की टीमें व्यापारियों को जागरूक कर रही हैं। दुकानदारों को कार्बाइड गन और कार्बाइड लैंप जैसी प्रतिबंधित वस्तुओं का भंडारण और बिक्री नहीं करने की समझाइश दी जा रही है। पुलिस के अनुसार मांग और मुनाफे के कारण कुछ व्यापारी ऐसी वस्तुएं बेच सकते हैं लेकिन इनके इस्तेमाल से गंभीर हादसे होने का खतरा बना रहता है। प्रशासन का उद्देश्य त्योहार से पहले ही इनकी बिक्री और इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए सतर्कता बढ़ाना है।
कार्बाइड गन बनाने से जुड़ी जानकारी सोशल मीडिया पर उपलब्ध होना भी चिंता का विषय है। आसान तरीके से इसे बनाने के प्रयास में लोग रासायनिक प्रतिक्रिया और विस्फोट के खतरे को नजरअंदाज कर सकते हैं। इसलिए बच्चों और अभिभावकों को इसके खतरों के बारे में जागरूक करना जरूरी है। दीपावली के दौरान सुरक्षित और पारंपरिक विकल्पों को प्राथमिकता देने के साथ ऐसी गनों से दूरी बनाए रखना ही दुर्घटनाओं से बचने का बेहतर तरीका है।