Sagar Self Immolation Case: सागर जिले के मकरोनिया स्थित महिंद्रा फाइनेंस कंपनी के कार्यालय में खुद को आग लगाने वाले कार मालिक नीलेश जैन की भोपाल के एम्स में इलाज के दौरान मौत हो गई है। लगभग 90 फीसदी झुलस चुके नीलेश ने जिंदगी और मौत की जंग लड़ते हुए दम तोड़ दिया।
बुधवार को पोस्टमार्टम के बाद जब नीलेश का शव उनके गृह ग्राम राहतगढ़ लाया गया, तो वहां का माहौल गमगीन हो गया। अंतिम यात्रा में शामिल परिजनों, समाजजनों और स्थानीय लोगों में फाइनेंस कंपनी के खिलाफ भारी आक्रोश और गहरा रोष देखने को मिला।
परिजनों ने महिंद्रा फाइनेंस कंपनी के अधिकारियों और रिकवरी एजेंटों पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। परिवार का कहना है कि नीलेश जैन ने कंपनी से कार फाइनेंस करवाई थी। आर्थिक तंगी के चलते केवल दो किस्तें ही बकाया रह गई थीं। इसके बावजूद कंपनी के कर्मचारियों ने नियमों को ताक पर रखकर जबरन उनकी कार जब्त कर ली। नीलेश पर लगातार मानसिक दबाव बनाया जा रहा था और उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा था। परिजनों का दावा है कि इसी मानसिक प्रताड़ना और समाज में हुई बदनामी से आहत होकर नीलेश ने यह खौफनाक कदम उठाने का फैसला किया।
इस घटना का दूसरा पहलू भी बेहद गंभीर है। जब नीलेश ने कार्यालय में खुद पर पेट्रोल डालकर आग लगाई, तो वहां मौजूद ब्रांच मैनेजर अतुल सिंह तोमर ने उन्हें बचाने का भरसक प्रयास किया था। इस कोशिश में ब्रांच मैनेजर भी आग की चपेट में आ गए और लगभग 60 प्रतिशत तक झुलस गए। सागर में शुरुआती इलाज के बाद उनकी नाजुक हालत को देखते हुए बुधवार को उन्हें ढाना हवाई पट्टी से 'एयर एंबुलेंस' के जरिए तत्काल दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल एयरलिफ्ट किया गया है, जहां वे फिलहाल वेंटिलेटर पर जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं।
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पुलिस ने मकरोनिया थाने में मर्ग कायम कर पूरे घटनाक्रम की बारीकी से जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि परिजनों द्वारा लगाए गए प्रताड़ना के आरोपों की गंभीरता से जांच की जा रही है। इसके साथ ही फाइनेंस कंपनी के ऑफिस के सीसीटीवी फुटेज और मृतक के मोबाइल फोन व अन्य दस्तावेजों को कब्जे में लिया गया है। जांच के निष्कर्षों और बयानों के आधार पर फाइनेंस कंपनी के दोषी कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।