इंडियन ग्रे वुल्फ के लिए मशहूर है वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व (सोर्स- एआई जनरेटेड इमेज)
सागर

सिर्फ बाघ ही नहीं, इंडियन ग्रे वुल्फ भी है शान; जानिए MP के इस अनोखे टाइगर रिजर्व की खासियत

Madhya Pradesh Wildlife: बाघों ही नहीं, इंडियन ग्रे वुल्फ के लिए भी मशहूर है एमपी का यह टाइगर रिजर्व, सागर क्षेत्र में फैले वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में 5 दशकों से बना हुआ है भेड़ियों का बसेरा।

सरजू पटेल, सजल रघुवंशी

Indian Grey Wolf In Madhya Pradesh: बाघ, तेंदुआ, हाथी, चीता और बारहसिंगा जैसे वन्यजीवों के लिए देशभर में कई टाइगर रिजर्व और अभयारण्य प्रसिद्ध हैं। लेकिन मध्य प्रदेश में एक ऐसा भी टाइगर रिजर्व है, जिसकी पहचान सिर्फ बाघों से नहीं, बल्कि इंडियन ग्रे वुल्फ यानी भारतीय भेड़ियों से भी जुड़ी हुई है। सागर और आसपास के क्षेत्र में फैला वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व (वीडीटीआर) करीब पांच दशकों से भेड़ियों की मौजूदगी के लिए खास माना जाता है।

पूर्व में नौरादेही अभयारण्य के नाम से पहचाने जाने वाले इस क्षेत्र को अब वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व के रूप में जाना जाता है। वर्ष 2018 में यहां बाघों की शिफ्टिंग के बाद क्षेत्र को टाइगर रिजर्व का दर्जा मिला। इसके बावजूद भारतीय ग्रे वुल्फ आज भी इस जंगल की प्रमुख वन्यजीव पहचान में शामिल है।

पांच दशक से बनी हुई है भेड़ियों की मौजूदगी

नौरादेही क्षेत्र में लंबे समय से भेड़ियों की मौजूदगी दर्ज की जाती रही है। खुले घास के मैदान, जंगल और वन क्षेत्र का मिश्रित भू-दृश्य भेड़ियों के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराता है।भेड़िया पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला वन्यजीव है। यह शाकाहारी और छोटे वन्यजीवों की आबादी को नियंत्रित करने में योगदान देता है और इस तरह जंगल के प्राकृतिक संतुलन का हिस्सा बना रहता है।

टाइगर रिजर्व बनने के बाद बदली पहचान

नौरादेही अभयारण्य को टाइगर रिजर्व में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव वर्ष 2018 में हुआ, जब यहां बाघों को लाकर बसाने की प्रक्रिया शुरू की गई। इसके बाद क्षेत्र की पहचान टाइगर रिजर्व के रूप में स्थापित हुई। हालांकि, बाघों की मौजूदगी बढ़ने के बावजूद यहां पहले से मौजूद वन्यजीवों की अपनी खास पहचान बनी हुई है। इनमें इंडियन ग्रे वुल्फ भी शामिल है।

'भेड़िया आज भी रिजर्व की खास पहचान'

वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. रजनीश सिंह के अनुसार, नौरादेही क्षेत्र में लंबे समय से इंडियन ग्रे वुल्फ की मौजूदगी रही है। टाइगर रिजर्व बनने के बाद भी भेड़ियों की यह पहचान कायम है। नौरादेही का जंगल इसलिए भी खास है क्योंकि यहां बड़े मांसाहारी वन्यजीवों के साथ-साथ अलग-अलग आवासों में रहने वाली कई प्रजातियों को देखा जा सकता है। यही जैव विविधता इस क्षेत्र को वन्यजीव प्रेमियों के लिए महत्वपूर्ण बनाती है।

बाघों के साथ भेड़ियों का भी बसेरा

आज वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व की चर्चा बाघों के साथ-साथ उसके विविध वन्यजीवन को लेकर भी होती है। यहां मौजूद घास के मैदान और वन क्षेत्र भेड़ियों सहित कई वन्यजीवों के लिए प्राकृतिक आवास उपलब्ध कराते हैं। पांच दशक पुरानी भेड़ियों की मौजूदगी और बाघों के नए बसेरे ने नौरादेही को मध्य प्रदेश के अलग पहचान वाले वन्य क्षेत्रों में शामिल कर दिया है। अब इस क्षेत्र में संरक्षण के साथ-साथ विभिन्न वन्यजीव प्रजातियों के प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखना वन विभाग के लिए महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

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