Rewa Plot Road Dispute : रीवा के रतहरा इलाके में प्लॉट तक पहुंचने वाले रास्ते को लेकर 12 खरीदारों का विवाद सामने आया है। खरीदारों का आरोप है कि प्लॉट बेचते समय उन्हें 20 फीट चौड़ा रास्ता दिखाया गया था और रजिस्ट्री के बाद करीब पांच वर्षों से वे इसी रास्ते का इस्तेमाल कर अपने घरों तक पहुंच रहे हैं। अब आरोप है कि इसी रास्ते की जमीन को बेचने और आवागमन बंद करने की कोशिश की जा रही है। मामले की शिकायत लेकर सभी खरीदार कलेक्ट्रेट पहुंचे और कलेक्टर से जांच कराकर रास्ता खुलवाने की मांग की।
शिकायतकर्ताओं के मुताबिक, प्लॉटिंग के दौरान उनके सामने 20 फीट चौड़ा रास्ता बताया गया था। इसी रास्ते को देखकर उन्होंने प्लॉट खरीदे और रजिस्ट्री के बाद करीब पांच वर्षों से इसी मार्ग से आवागमन कर रहे हैं। खरीदारों का कहना है कि प्लॉटिंग से पहले रास्ते के लिए जमीन की व्यवस्था की गई थी और इसी आधार पर उन्हें प्लॉट बेचे गए थे।
खरीदारों का आरोप है कि वर्षों से इस्तेमाल किए जा रहे रास्ते को लेकर अब विवाद खड़ा कर दिया गया है। उनका कहना है कि रास्ते पर पिलर लगाकर आवागमन रोकने की कोशिश की गई। इसके अलावा उन्हें वैकल्पिक रास्ते के तौर पर दूसरी तरफ मौजूद सरकारी जमीन या नाले की जमीन से निकलने की बात कही जा रही है। पीड़ितों का कहना है कि अगर मौजूदा रास्ता बंद हुआ तो उनके लिए अपने ही घरों तक पहुंचना मुश्किल हो जाएगा।
मामले में रीवा कलेक्ट्रेट से एक भावुक तस्वीर भी सामने आई। शिकायत लेकर पहुंचे एक फौजी ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि देश की सेवा में तैनात होने के बावजूद उसे अपनी जमीन और रास्ते के विवाद को लेकर सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। अपनी समस्या बताते-बताते वह भावुक हो गया और उसकी आंखों से आंसू छलक पड़े। उसका कहना है कि ड्यूटी के बीच समय निकालकर वह लगातार समस्या के समाधान के लिए प्रयास कर रहा है।
पीड़ितों ने प्लॉट बेचने और प्लॉटिंग से जुड़े लोगों पर गंभीर आरोप लगाते हुए पूरे मामले की जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि प्लॉट बेचते समय रास्ता दिखाया गया था और अब उसी रास्ते को बंद करने की कोशिश की जा रही है तो मामले की जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। शिकायत में धोखाधड़ी समेत अन्य कानूनी कार्रवाई की मांग भी की गई है।
12 प्लॉट खरीदारों ने कलेक्टर से मांग की है कि राजस्व रिकॉर्ड और मौके की स्थिति की जांच कर रास्ते की वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए। उनका कहना है कि रास्ता बंद होने से सिर्फ उनके परिवार ही नहीं, बल्कि वहां रहने वाले कई अन्य परिवारों का आवागमन भी प्रभावित होगा। फिलहाल रीवा जिला प्रशासन की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि रास्ते की जमीन की वास्तविक स्थिति क्या है और खरीदारों के आरोपों में कितनी सच्चाई है।