खसरे का आउटब्रेक (सोर्स- सोशल मीडिया) 
रतलाम

MP में खसरे का 'आउटब्रेक'! शुरुआती 4 महीनों में ही मिले 800 मरीज; इन दो क्षेत्रों में सबसे ज्यादा मामले

MP News: इस साल खसरे के मामलों में भारी उछाल देखा गया है। शुरुआती 4 महीनों में ही 800 मरीज मिले हैं, जिनमें रतलाम सबसे अधिक प्रभावित है। विशेषज्ञ वैक्सीनेशन के दावों पर सवाल उठा रहे हैं।

सजल रघुवंशी

Measles Outbreak Madhya Pradesh 2026: ऐसा माना जाता है कि जिस साल आम के पेड़ों पर ज्यादा बौर आती है, उसी साल खसरे के मामलों में भी बढ़ोतरी देखने को मिलती है। हालांकि, आम की बौर और खसरे के बीच कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है बल्कि एक ऐसा चक्र है जिसमें लगभग हर चौथे वर्ष दोनों स्थितियां साथ देखने को मिलती हैं। इसी वजह से साल 2026 में खसरे के अधिक मरीज मिलने की आशंका जताई गई थी, जो अब सही साबित होती दिख रही है।

साल 2025 में पूरे साल के दौरान प्रदेश में खसरे के करीब 1300 मामले सामने आए थे। जबकि इस साल शुरुआती चार महीनों में ही 800 मरीज मिल चुके हैं। लैब जांच में इन मामलों में बीमारी की पुष्टि भी हो चुकी है। इनमें कुछ मामले आउटब्रेक यानी बीमारी के अचानक तेजी से फैलने से जुड़े हैं, जबकि बाकी सामान्य संक्रमण के रूप में सामने आए हैं।

प्रदेश में इन दो जगह सबसे ज्यादा मामले

मार्च 2026 तक की स्थिति देखें तो प्रदेश में सबसे ज्यादा 123 खसरे के मामले मध्य प्रदेश के रतलाम में दर्ज किए गए हैं, जबकि पिछले वर्ष यहां केवल 23 मरीज सामने आए थे। इसके अलावा मुरैना में 103, भिंड में 92 और विदिशा में 76 मरीज इस वर्ष अब तक मिल चुके हैं।

क्या होती है आउटब्रेक की स्थिति

किसी विशेष क्षेत्र में एक ही साल के दौरान जब खसरे के पांच या उससे अधिक मामले सामने आते हैं, तो उसे आउटब्रेक की स्थिति माना जाता है। ऐसी परिस्थिति में स्वास्थ्य विभाग को तुरंत रोकथाम और नियंत्रण के उपाय लागू करने होते हैं।

96 प्रतिशत बच्चों को लगी है वैक्सीन- स्वास्थ्य विभाग

स्वास्थ्य विभाग के हेल्थ मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम (एचएमआईएस) के आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में 96 प्रतिशत बच्चों को खसरे से बचाव की दोनों वैक्सीन डोज लग चुकी हैं। हालांकि, विशेषज्ञ इन आंकड़ों की सटीकता और जमीनी स्थिति को लेकर सवाल भी उठा रहे हैं।

यह हैं खसरे के लक्षण

खसरा एक बेहद संक्रामक वायरल संक्रमण है, जिसके लक्षण आमतौर पर वायरस के संपर्क में आने के 10 से 14 दिनों के भीतर दिखाई देने लगते हैं। इस बीमारी में मरीज को तेज बुखार, सूखी खांसी, नाक बहना और आंखों में लालिमा व पानी आने जैसी समस्याएं होती हैं। इसके साथ ही शरीर पर लाल रंग के दाने या चकत्ते उभरने लगते हैं, जो धीरे-धीरे पूरे शरीर में फैल सकते हैं।

आंबेडकर-नेहरू समेत 286 दिग्गजों के दस्तखत, सोने से सजे पन्ने... ग्वालियर में सुरक्षित है संविधान की असली प्रति

आज की ताजा खबर 14 अगस्त LIVE: जेपी नड्डा अस्पताल में भर्ती; चमोली लैंडस्लाइड हादसे में मृतकों की संख्या हुई 7

'जोकर' बयान पर राहुल गांधी के समर्थन में उतरे संजय राउत, कहा- दिल्ली आएं मोहन भागवत और खोलें मोदी-शाह की पोल

अस्पताल से डिस्चार्ज हुए सुखबीर बादल, बोले- न डरता हूं, न डरा हूं, पंजाब का माहौल नहीं बिगड़ने देंगे

समय रैना को सुप्रीम कोर्ट से मिली बड़ी राहत, इंडियाज गॉट लेटेंट मामले में सभी FIR रद्द करने के दिए आदेश