Morena Karasdev Baba Mela : मुरैना के जौरा क्षेत्र के प्रसिद्ध आस्था केंद्र कारसदेव बाबा मंदिर पर बुधवार को वार्षिक जात और मेले का आयोजन किया गया। पगारा रोड स्थित मंदिर परिसर में सुबह से ही श्रद्धालुओं और पशुपालकों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। दूर-दराज के गांवों से पहुंचे हजारों लोगों ने बाबा के दरबार में दही और अन्य प्रसाद चढ़ाकर पूजा-अर्चना की तथा अपने पशुओं के स्वस्थ रहने और परिवार में सुख-समृद्धि की कामना की।
ग्रामीण अंचल में कारसदेव बाबा को पशुधन की रक्षा करने वाले देवता के रूप में मान्यता प्राप्त है। पशुपालकों में ऐसी आस्था है कि बाबा की कृपा से बीमार पशु स्वस्थ होते हैं। वहीं दूध न देने वाले पशुओं के दोबारा दूध देने और संतानहीन पशुओं को संतान प्राप्ति का आशीर्वाद मिलने की भी मान्यता है। इसी विश्वास के चलते हर साल जात के अवसर पर बड़ी संख्या में पशुपालक यहां पहुंचते हैं।
जात में शामिल होने पहुंचे श्रद्धालुओं ने मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। बाबा को दही और अन्य प्रसाद का भोग लगाया गया। कई पशुपालक मंदिर में पूजा करने के बाद बाबा की भभूत भी अपने साथ लेकर गए। श्रद्धालुओं की मान्यता है कि इस भभूत का उपयोग वे अपने पशुओं के लिए करते हैं। सुबह से शुरू हुआ श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला देर शाम तक जारी रहा।
वार्षिक जात के अवसर पर मंदिर परिसर में पूरे दिन मेले जैसा माहौल बना रहा। आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के साथ दूर-दराज के गांवों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। श्रद्धालुओं की भीड़ के कारण मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में दिनभर चहल-पहल रही। धार्मिक आयोजन के साथ मेले में ग्रामीण जीवन और स्थानीय संस्कृति की भी झलक देखने को मिली।
कारसदेव बाबा के दरबार में पहुंचे पशुपालकों ने अपने पशुधन की सलामती के लिए मन्नत मांगी। लोगों ने बाबा से पशुओं को बीमारी और संकट से बचाने की प्रार्थना की। कई श्रद्धालु अपनी पुरानी मन्नत पूरी होने के बाद भी बाबा के दर्शन और पूजा के लिए पहुंचे। जात के दौरान ग्रामीणों में बाबा के प्रति गहरी आस्था और विश्वास देखने को मिला।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन की ओर से सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया। प्रशासन की निगरानी में श्रद्धालुओं ने व्यवस्थित तरीके से मंदिर पहुंचकर बाबा के दर्शन किए। भीड़ के बावजूद आयोजन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ और देर शाम तक मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही।
कारसदेव बाबा की वार्षिक जात ग्रामीण अंचल की धार्मिक आस्था और वर्षों पुरानी परंपरा से जुड़ी है। पशुधन को परिवार की आजीविका का महत्वपूर्ण आधार मानने वाले ग्रामीणों के लिए यह आयोजन विशेष महत्व रखता है। हर साल जात के मौके पर बड़ी संख्या में पशुपालकों का जुटना कारसदेव बाबा के प्रति लोगों की गहरी आस्था को दर्शाता है।