

RLD Swabhiman Rally: उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव के लिए सियासी हलचल तेज हो गई है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभाओं को लेकर गुरुवार को आरएलडी की रैली आयोजित की गई, जिसका नेतृत्व खुद जयंत चौधरी करेंगे।
इसी पृष्ठभूमि में, राष्ट्रीय लोकदल (RLD) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने सहारनपुर के रामपुर मनिहारान स्थित गोचर महाविद्यालय में आयोजित 'स्वाभिमान रैली' को संबोधित करेंगे। देखा जाए तो इस रैली का मुख्य उद्देश्य पश्चिमी यूपी में RLD की सांगठनिक ताकत और राजनीतिक सक्रियता का पुरजोर प्रदर्शन करना है।
इस स्वाभिमान रैली में शामिल होने के लिए जयंत चौधरी आज यानी 3 सितंबर को 11.30 बजे सहारनपुर पहुंचेंगे और चुनाव प्रचार का आगाज करेंगे। जयंत चौधरी यहां गुर्जर समाज के बीच जनसभा को करेंगे संबोधित। इसी रैली के साथ जयंत चौधरी का चुनावी रैलियों का सिलसिला शुरू होगा।
यह रैली सियासी मायनों में चर्चा का विषय बनी हुई है क्योंकि ठीक एक दिन पहले समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने भी सहारनपुर का दौरा किया था और भाजपा पर तीखा हमला बोला था।
वर्तमान में RLD भाजपा के साथ गठबंधन में है और जयंत चौधरी केंद्र सरकार में मंत्री हैं, इसलिए इस रैली को सपा के सीधे जवाब के बजाय RLD द्वारा पश्चिमी यूपी में अपनी स्वतंत्र जमीन को मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
दोनों राजनीतिक पार्टियों का केंद्र किसान और जाट वोट बैंक है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में किसान और जाट मतदाता पारंपरिक रूप से RLD का मुख्य आधार रहे हैं।
सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली, बागपत, मेरठ और बिजनौर जैसे जिलों में किसान मुद्दे और ग्रामीण सरोकार लंबे समय से चुनावी राजनीति के केंद्र बिंदु रहे हैं। RLD अपनी इस 'स्वाभिमान रैली' के माध्यम से इन्हीं क्षेत्रीय सम्मान, ग्रामीण समस्याओं और किसान मुद्दों को उठाकर अपने पुराने और पारंपरिक जनाधार को पुनः सुदृढ़ करना चाहती है।
RLD के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती अपनी वोट बैंक को बचाने की है। साथ ही नए वोट बैंक और युवाओं को साधने की है। आगामी विधानसभा चुनाव 2027 के चुनावी रण में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए पार्टी को गैर-जाट, पिछड़े, युवाओं और अन्य सामाजिक वर्गों तक अपनी पहुंच का व्यापक विस्तार करना होगा।
यह रणनीति अखिलेश यादव के 'PDA' (पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक) समीकरण के जवाब में RLD के अपने सामाजिक समीकरण को खड़ा करने की एक बड़ी कोशिश है। इसी तरह, सहारनपुर में दो दिनों में दो विपरीत राजनीतिक पार्टियों की दो अलग-अलग रणनीतियां देखने को मिल रही हैं। एक तरफ सपा का पीडीए विस्तार है, तो दूसरी तरफ RLD का अपने पारंपरिक किसान-जाट आधार को और अधिक व्यापक बनाने का प्रयास।