MP Waqf Board Hindu Members: मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड में वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के तहत गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल किए जाने की प्रक्रिया को लेकर प्रदेश में राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है। इस मुद्दे पर खंडवा के कई मुस्लिम संगठनों ने नाराजगी जताई है और नियुक्तियों को अदालत में चुनौती देने की बात कही है।
मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि वक्फ संपत्तियां धार्मिक आस्था से जुड़ी होती हैं और उनका प्रबंधन ऐसे लोगों के हाथों में होना चाहिए जो इस व्यवस्था और उसकी धार्मिक परंपराओं से परिचित हों। उनका तर्क है कि वक्फ की संपत्तियां मुस्लिम समुदाय द्वारा धार्मिक और सामाजिक उद्देश्यों के लिए समर्पित की जाती हैं, इसलिए इनके प्रबंधन में मुस्लिम सदस्यों की प्रमुख भूमिका होनी चाहिए।
मुस्लिम समाज के कुछ प्रतिनिधियों ने यह भी कहा कि वक्फ से जुड़े कई दस्तावेज उर्दू भाषा में होते हैं, जिन्हें समझने और उनकी मूल भावना के अनुरूप लागू करने के लिए संबंधित धार्मिक और भाषाई जानकारी आवश्यक होती है।
वहीं, कुछ मुस्लिम संगठनों ने मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड में प्रस्तावित गैर-मुस्लिम सदस्यों में से एक को लेकर भी आपत्ति दर्ज कराई है। संगठनों ने संबंधित व्यक्ति के खिलाफ विभिन्न आरोप लगाए हैं और उनकी नियुक्ति पर सवाल उठाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित व्यक्ति की ओर से इस पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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इस मुद्दे पर कांग्रेस के कुछ नेताओं ने भी नियुक्तियों का विरोध करते हुए न्यायालय का रुख करने की बात कही है। उनका कहना है कि वक्फ बोर्ड की संरचना और नियुक्तियों से जुड़े प्रावधानों की न्यायिक समीक्षा आवश्यक है। फिलहाल, वक्फ बोर्ड में नई नियुक्तियों को लेकर विवाद गहराता नजर आ रहा है। आने वाले दिनों में इस मामले में कानूनी और राजनीतिक गतिविधियां तेज होने की संभावना है।
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