Khandwa British Era Weather Station: एआई तकनीक और आधुनिक सेंसर, इंटरनेट व सैटेलाइट आधारित वेदर सिस्टम के दौर में जहां मौसम की निगरानी पूरी तरह हाईटेक हो चुकी है, वहीं मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में आज भी ब्रिटिशकालीन तापमान मापक यंत्र मौजूद है। खास बात यह है कि यह पुराना उपकरण आज भी पूरी तरह कार्यशील है और सटीक तापमान दर्ज करता है।
बता दें कि निमाड़ क्षेत्र अपनी भीषण गर्मी के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। इन दिनों खंडवा जिले में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है, जिससे जनजीवन प्रभावित है। तेज गर्मी के कारण लोग केवल आवश्यक कार्यों के लिए ही घरों से बाहर निकल रहे हैं। वहीं, बाजारों और चौराहों पर शीतल पेय की दुकानों पर भीड़ देखी जा रही है, जहां लोग गर्मी से राहत पाने के लिए रुक रहे हैं।
गौरतलब है कि, यहां का तापमान मापक केंद्र ब्रिटिशकालीन होने के साथ रोचक भी है। यह तापमान मापक केंद्र ऐतिहासिक होने के अलावा बिना बिजली और बिना इंटरनेट के आज भी सटीक तापमान बता रहा है। पारे से बने थर्मामीटर से तापमान रिकॉर्ड किया जाता है। खंडवा का यह ब्रिटिशकालीन तापमान मापक केंद्र सीमित संसाधनों के बावजूद पहले भी मौसम विज्ञान काफी विश्वस्नीय हुआ करता था। यह सिर्फ एक पुरानी तकनीक ही नहीं बल्कि मौसम विज्ञान की एक जीवित एतिहासिक धरोहर है।
ब्रिटिश शासनकाल में भारत में मौसम मापन के लिए एक व्यापक नेटवर्क विकसित किया गया था। रेलवे संचालन, कृषि नियोजन और प्रशासनिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए मौसम संबंधी आंकड़ों का नियमित रिकॉर्ड रखना आवश्यक माना जाता था। इसी उद्देश्य से देश के कई शहरों में तापमान मापन केंद्र स्थापित किए गए, जिनमें खंडवा भी शामिल रहा।
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स्वास्थ्य विभाग में पदस्थ बद्रीप्रसाद गुप्ता ने बताया वर्षों से नियमित रूप से तापमान दर्ज करने पहुंचता हूँ। वर्षों पुरानी यह व्यवस्था अब एक तरह से विरासत बन चुकी है, कई पुराने मरकरी थर्मामीटर भले खराब हो चुके है, लेकिन जो यंत्र अब भी मौजूद है वह उस दौर के वैज्ञानिक तकनीक के साक्षी है।