नरेंद्र के अंगों को अहमदाबाद भेजने के लिए बने दो ग्रीन कॉरिडोर फोटो सोर्स - सोशल मीडिया
जबलपुर

जबलपुर : ब्रेन डेड सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने दिया कई लोगों को जीवनदान, नरेंद्र का हार्ट और लीवर अहमदाबाद भेजा गया

Jabalpur Organ Donation: सड़क हादसे में घायल 40 वर्षीय नरेंद्र कुमार रजक को डॉक्टरों ने ब्रेन डेड घोषित किया। पत्नी पूजा और परिजनों ने लिया अंगदान का फैसल। अंगदान से जरूरतमंदों को मिलेगी नई जिंदगी।

पवन पटेल, शाजेब खान

Highlights :

  • जबलपुर के 40 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर नरेंद्र कुमार रजक का अंगदान।

  • 31 अक्टूबर को सड़क हादसे में हुए थे गंभीर रूप से घायल।

  • 2 नवंबर को डॉक्टरों ने घोषित किया ब्रेन डेड।

  • पत्नी और परिवार ने लिया अंगदान का फैसला।

Narendra Kumar Rajak Organ Donation : मौत के बाद भी कोई इंसान दूसरों की जिंदगी बचा सकता है। इसकी मिसाल एमपी के जबलपुर में देखने को मिली है। यहां सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हुए 40 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर नरेंद्र कुमार रजक के अंगदान से कई जरूरतमंद मरीजों को नई जिंदगी मिलने की उम्मीद है।

नरेंद्र को डॉक्टरों ने ब्रेन डेड घोषित कर दिया था। इसके बाद उनकी पत्नी और परिवार के सदस्यों ने दुख की इस घड़ी में मानवता की मिसाल पेश करते हुए अंगदान का फैसला लिया।

HCL कंपनी में कार्यरत थे नरेंद्र कुमार रजक

जबलपुर निवासी नरेंद्र कुमार रजक एचसीएल कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के पद पर कार्यरत थे। 31 अक्टूबर को हुए सड़क हादसे में वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उन्हें उपचार के लिए बड़ेरिया मेट्रो प्राइम मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। यहां इलाज के दौरान 2 नवंबर को डॉक्टरों ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया। इसके बाद पत्नी पूजा रजक और परिवार के अन्य सदस्यों ने उनके अंगदान का निर्णय लिया।

बनाए गए दो ग्रीन कॉरिडोर

नरेंद्र के अंगों को निर्धारित अस्पतालों तक समय पर पहुंचाने के लिए जिला प्रशासन ने दो ग्रीन कॉरिडोर तैयार किए। पहला ग्रीन कॉरिडोर मेट्रो प्राइम हॉस्पिटल से डुमना एयरपोर्ट तक बनाया गया। यहां से अंगों को विशेष विमान के जरिए अहमदाबाद भेजने की व्यवस्था की गई। वहीं दूसरा ग्रीन कॉरिडोर मेट्रो प्राइम हॉस्पिटल से नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज तक बनाया गया ताकि अंगों को बिना देरी के अस्पताल पहुंचाया जा सके।

लिवर, किडनी, आंखें और त्वचा से मिलेगी नई जिंदगी

नरेंद्र के अंगदान के जरिए लिवर, किडनी, आंखों और त्वचा जैसे अंगों एवं ऊतकों से जरूरतमंद मरीजों की मदद की जाएगी। अंगों को सुरक्षित तरीके से निकालने और प्रत्यारोपण की प्रक्रिया के लिए अहमदाबाद के मारेंगो सिम्स अस्पताल से विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम भी जबलपुर पहुंची थी।

प्रशासन और पुलिस ने संभाली ग्रीन कॉरिडोर की व्यवस्था

पूरी प्रक्रिया के दौरान जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, अस्पताल प्रबंधन और जबलपुर पुलिस ने आपसी समन्वय से काम किया। कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा और प्रशासनिक अधिकारियों की निगरानी में दोनों ग्रीन कॉरिडोर तैयार किए गए ताकि एंबुलेंस को रास्ते में किसी तरह की बाधा का सामना न करना पड़े और अंगों को निर्धारित स्थानों तक समय पर पहुंचाया जा सके।

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