ओवरब्रिज का टूटा हुआ हिस्सा, फोटो- सोशल मीडिया 
मध्य प्रदेश

जबलपुर-भोपाल NH-45 पर बड़ा हादसा: शाहपुरा रेलवे ओवरब्रिज का दूसरा हिस्सा भी धराशायी, भ्रष्टाचार की खुली पोल

NH 45 Bridge Collapse: जबलपुर-भोपाल नेशनल हाईवे-45 पर शाहपुरा रेलवे ओवरब्रिज का बड़ा हिस्सा रविवार को ढह गया। 6 महीने पहले एक लेन टूटी थी, अब दूसरी लेन गिरने से निर्माण गुणवत्ता पर सवाल खड़े हुए हैं।

प्रतीक पाण्डेय

 Shahpura Railway Overbridge Collapsed: मध्य प्रदेश की लाइफलाइन कहे जाने वाले जबलपुर-भोपाल नेशनल हाईवे-45 पर रविवार शाम एक बड़ा हादसा टल गया। शाहपुरा के पास स्थित रेलवे ओवरब्रिज का करीब 200 मीटर हिस्सा अचानक भरभराकर गिर गया। गौरतलब है कि इस पुल का एक हिस्सा पहले से ही मरम्मत के अधीन था और अब दूसरी लेन भी धराशायी हो गई है।

जबलपुर को राजधानी भोपाल से जोड़ने वाले नेशनल हाईवे-45 पर शाहपुरा के पास बना रेलवे ओवरब्रिज रविवार शाम करीब 5 बजे अचानक ढह गया। प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय निवासियों के अनुसार, पुल का करीब 200 मीटर का हिस्सा इस तरह गिरा जैसे कोई शक्तिशाली भूकंप आया हो। गनीमत यह रही कि जिस समय पुल का यह बड़ा स्लैब नीचे गिरा, उस स्थान पर कोई वाहन मौजूद नहीं था, जिससे एक भयावह जनहानि टल गई। इसी ब्रिज का एक हिस्सा दिसंबर महीने में भी इसी तरह टूटकर गिर गया था। उस समय अधिकारियों ने एक तरफ का आवागमन बंद कर मरम्मत कार्य शुरू किया था और दूसरी लेन से यातायात जारी रखा था, लेकिन रविवार को चालू लेन भी जवाब दे गई।

भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा 391 करोड़ का प्रोजेक्ट

इस महत्वपूर्ण हाईवे प्रोजेक्ट का निर्माण मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (MPRDC) की प्रत्यक्ष निगरानी में हुआ था। अंधमूक बायपास से हिरन नदी तक के इस 54 किलोमीटर लंबे मार्ग और फ्लाईओवर के निर्माण पर लगभग391 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि खर्च की गई थी। इस पुल का निर्माण कार्य नवंबर 2015 में शुरू हुआ था और जनवरी 2020 में इसे पूर्ण घोषित कर जनता के लिए खोल दिया गया था। विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पुल अभी अपने गारंटी पीरियड में ही था, लेकिन सड़क पर बड़ी-बड़ी दरारें और महज 5 साल में ब्रिज का दो बार गिरना साफ तौर पर घटिया निर्माण सामग्री और भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।

रेलवे ट्रैक से महज 50 मीटर की दूरी: टल गया बड़ा रेल हादसा

जिस स्थान पर ओवरब्रिज का हिस्सा टूटा है, उसके ठीक नीचे यानी लगभग 50 मीटर के दायरे में मुख्य रेलवे ट्रैक गुजरता है। प्रशासन और रेलवे अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि यदि यह मलबा सीधे रेल पटरी पर गिरता या उस समय वहां से कोई ट्रेन गुजर रही होती, तो यह देश का एक बड़ा रेल हादसा बन सकता था। वर्तमान में सुरक्षा के लिहाज से रेलवे और स्थानीय प्रशासन ने पूरे क्षेत्र की निगरानी बढ़ा दी है और मलबे की स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

ब्लैकलिस्टेड कंपनी और बिना हैंडओवर टोल की वसूली

इस विवादित पुल का निर्माण राजस्थान की 'बांगड़ इंफ्रा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड' और 'मेसर्स सोराठिया' द्वारा किया गया था। निर्माण की बेहद खराब गुणवत्ता के कारण इन कंपनियों को करीब एक महीने पहले ही ब्लैकलिस्ट किया जा चुका है। इस मामले में एक और चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ है कि एनएचएआई (NHAI) पिछले 5 साल से इस रास्ते पर वाहनों से टोल वसूल रहा है, लेकिन गुणवत्ता में गंभीर कमियों के कारण विभाग ने अभी तक इस सड़क और पुल को आधिकारिक रूप से निर्माण एजेंसी से हैंडओवर नहीं लिया है। एमपीआरडीसी के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर राकेश मोरे के अनुसार, अब क्षतिग्रस्त हिस्से का पुनर्निर्माण संबंधित कंपनी को ही अपने खर्च पर करना होगा।

यातायात पूरी तरह ठप: इन वैकल्पिक रास्तों का करें प्रयोग

हादसे के तुरंत बाद जबलपुर-भोपाल नेशनल हाईवे-45 को अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया गया है। ट्रैफिक को अब शाहपुरा के भीतर से या पाटन और चरगवां जैसे वैकल्पिक मार्गों की ओर डायवर्ट किया गया है। वैकल्पिक मार्ग अपनाने के कारण न केवल यात्रियों को अधिक समय लग रहा है, बल्कि यात्रा की दूरी भी काफी बढ़ गई है। टोल प्लाजा पर बिना शुल्क निकासी के निर्देश के बावजूद कई यात्रियों ने अवैध वसूली की शिकायतें भी दर्ज कराई हैं।

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