Kailash Vijayvargiya On Vibhajan Ki Vibhishika : विभाजन विभीषिका दिवस के अवसर पर मध्य प्रदेश के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भारत विभाजन के दौरान हुए विस्थापन, हिंसा और त्रासदी को याद किया। इंदौर में उन्होंने कहा कि देश के लोगों को यह जानना और याद रखना जरूरी है कि आजादी के पीछे कितना दर्द, पीड़ा और चीत्कार छिपी हुई थी। उन्होंने कहा कि विभाजन के दौरान लाखों लोगों को अपना घर-बार छोड़कर विस्थापित होना पड़ा और बड़ी संख्या में लोगों की जान गई।
कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2021 में 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी। इसका उद्देश्य विभाजन के दौरान पीड़ित लोगों के संघर्ष, विस्थापन और बलिदान को याद करना है। उन्होंने कहा कि इतिहास के इस दर्दनाक अध्याय को भुलाया नहीं जाना चाहिए, बल्कि नई पीढ़ी को भी इसके बारे में जानकारी होनी चाहिए।
कैलाश विजयवर्गीय ने तत्कालीन नेतृत्व और खास तौर पर जवाहरलाल नेहरू पर निशाना साधते हुए कहा कि विभाजन का फैसला जल्दबाजी में लिया गया था। उन्होंने कहा कि जब देश का विभाजन होता है तो उसके साथ बड़े पैमाने पर विस्थापन भी होता है, लेकिन विस्थापित लोगों के पुनर्वास के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई। उन्होंने विभाजन को विश्व इतिहास के सबसे बड़े मानवीय विस्थापनों में से एक बताते हुए कहा कि करोड़ों लोगों को अपने घर और जमीन छोड़कर दूसरी जगह जाना पड़ा। विजयवर्गीय ने विभाजन के दौरान बड़ी संख्या में लोगों की हत्या का भी दावा किया।
कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि विभाजन के दौरान पाकिस्तान में हिंदुओं और महिलाओं के साथ बड़े पैमाने पर हिंसा और अत्याचार हुए। उन्होंने कहा कि इस त्रासदी का दर्द आज भी लोगों की स्मृतियों में मौजूद है। उनके मुताबिक, विभाजन के दौरान लाखों लोगों की जान गई और बड़ी संख्या में परिवार हमेशा के लिए बिछड़ गए।
विजयवर्गीय ने कहा कि विभाजन विभीषिका दिवस सिर्फ अतीत की घटनाओं को याद करने का दिन नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को उस दौर की त्रासदी से परिचित कराने का अवसर भी है। उन्होंने कहा कि इतिहास से सबक लेकर ऐसी परिस्थितियों को दोबारा पैदा होने से रोकना जरूरी है। उन्होंने आज की राजनीतिक पार्टियों से भी अतीत की त्रासदी से सबक लेने और तुष्टीकरण की राजनीति छोड़कर विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि देश को विभाजन के दर्द को याद रखते हुए एकता, विकास और राष्ट्रहित की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।