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इंदौर के विजय नगर में रावण दहन कार्यक्रम के दौरान मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की गाड़ी भीड़ में फंसी।
वाहन मंच के करीब नहीं पहुंच सका, जिसके बाद मंत्री को पैदल चलकर मंच तक जाना पड़ा।
अव्यवस्था से नाराज मंत्री ने मंच से पुलिस प्रशासन को व्यवस्था सुधारने की नसीहत दी।
कैलाश विजयवर्गीय ने भारी भीड़ के बीच आपातकालीन वाहनों के लिए एक लेन खाली रखने पर जोर दिया।
Kailash Vijayvargiya Police Statement : इंदौर के विजय नगर में आयोजित रावण दहन कार्यक्रम के दौरान उस वक्त अव्यवस्था की स्थिति बन गई, जब मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का वाहन भारी भीड़ के कारण मंच तक नहीं पहुंच सका। ऐसे में मंत्री को गाड़ी से उतरकर पैदल ही मंच तक जाना पड़ा। इस स्थिति से नाराज मंत्री ने मंच से ही
पुलिस प्रशासन को व्यवस्था सुधारने की नसीहत दे दी। उन्होंने विशेष रूप से बड़े आयोजनों में भीड़ नियंत्रण और आपातकालीन वाहनों के लिए रास्ता खाली रखने की जरूरत पर जोर दिया।
विजय नगर में आयोजित रावण दहन कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग शामिल होने पहुंचे थे। भीड़ का दबाव इतना अधिक था कि मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का वाहन कार्यक्रम स्थल पर मंच के नजदीक तक नहीं पहुंच सका। इसके बाद उन्हें वाहन से उतरकर पैदल चलना पड़ा। इस घटनाक्रम ने कार्यक्रम के दौरान यातायात और भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए।
कार्यक्रम के मंच पर पहुंचने के बाद कैलाश विजयवर्गीय ने पुलिस प्रशासन को व्यवस्थाएं दुरुस्त करने की नसीहत दी। मंत्री ने कहा कि कार्यक्रम में काफी भीड़ मौजूद है इसलिए पुलिस को व्यवस्था संभालने पर विशेष ध्यान देना चाहिए। उन्होंने आपातकालीन वाहनों की आवाजाही के लिए एक लेन खाली रखने की जरूरत भी बताई ताकि किसी आपात स्थिति में परेशानी न हो।
बड़े सार्वजनिक आयोजनों में भीड़ को नियंत्रित करना और आपातकालीन सेवाओं के लिए रास्ता उपलब्ध रखना बेहद जरूरी होता है। रावण दहन जैसे कार्यक्रमों में लोगों की भारी मौजूदगी के कारण यातायात प्रभावित होने की आशंका रहती है। ऐसे में एंबुलेंस, दमकल और अन्य आपातकालीन वाहनों के लिए रास्ता पहले से निर्धारित होना चाहिए। मंत्री की टिप्पणी ने इस व्यवस्था के महत्व को फिर चर्चा में ला दिया।
मंत्री का वाहन मंच तक नहीं पहुंच पाना केवल एक वीआईपी मूवमेंट की समस्या नहीं, बल्कि भीड़ प्रबंधन पर भी सवाल खड़े करता है। अगर किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में रास्ते इतने बाधित हो जाएं कि वाहन आगे न बढ़ सकें, तो एंबुलेंस, दमकल और दूसरे आपातकालीन वाहनों के लिए रास्ता बनाए रखना मप्र प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी बन जाती है। मंत्री ने मंच से जिस इमरजेंसी लेन की बात कही, वो व्यवस्था हर बड़े आयोजन में पहले से सुनिश्चित होनी चाहिए।
मंत्री जी को मंच तक पहुंचने के लिए पैदल चलना पड़ा, तब पुलिस को व्यवस्था सुधारने की नसीहत भी मिल गई। लेकिन सवाल ये है कि क्या ऐसी व्यवस्थाएं किसी वीआईपी के फंसने के बाद ही याद आती हैं, भीड़ जुटने वाले कार्यक्रमों में आम लोगों की सुरक्षा, सुगम आवाजाही और इमरजेंसी वाहनों के लिए रास्ता पहले से तय करना जरूरी है। व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए कि किसी मंत्री को भी शिकायत का मौका न मिले और आम जनता को भी परेशानी न उठानी पड़े।