

MP Chhattisgarh DR Dispute Pensioners: मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के बीच राज्य विभाजन के बाद से चला आ रहा पेंशनर्स की महंगाई राहत (डीआर) का 26 साल पुराना विवाद अब सुलझने की दिशा में बढ़ता नजर आ रहा है। मध्य प्रदेश सरकार ने छत्तीसगढ़ सरकार को एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव भेजते हुए डीआर भुगतान के लिए "स्थायी सहमति" देने का आग्रह किया है। यदि यह प्रस्ताव मंजूर हो जाता है तो दोनों राज्यों के लाखों पेंशनर्स को बड़ी राहत मिल सकती है।
जानकारी के अनुसार, वर्तमान व्यवस्था में जब भी महंगाई राहत में बढ़ोतरी की जाती है, तब मध्य प्रदेश सरकार को छत्तीसगढ़ सरकार की सहमति का इंतजार करना पड़ता है। इस प्रक्रिया में देरी होने के कारण पेंशनर्स को बढ़ी हुई डीआर का लाभ समय पर नहीं मिल पाता। कई बार आदेश जारी होने और भुगतान शुरू होने के बीच लंबा अंतराल देखने को मिलता है।
मध्य प्रदेश वित्त विभाग ने अपने प्रस्ताव में राज्य पुनर्गठन अधिनियम-2000 की धारा-49 का हवाला दिया है। विभाग का तर्क है कि राज्य विभाजन के समय कर्मचारियों और वित्तीय दायित्वों का बंटवारा पहले ही तय किया जा चुका है। पेंशन संबंधी वित्तीय दायित्वों का अनुपात भी लगभग 75:25 निर्धारित है। ऐसे में मध्य प्रदेश सरकार को हर बार डीआर बढ़ाने के लिए अलग-अलग सहमति लेने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए।
सरकार ने सुझाव दिया है कि छत्तीसगढ़ सरकार इस विषय को अपनी कैबिनेट में रखकर एक बार स्थायी सहमति प्रदान कर दे। इससे भविष्य में महंगाई राहत बढ़ाने के लिए बार-बार मंजूरी लेने की प्रक्रिया समाप्त हो जाएगी और दोनों राज्यों के बीच प्रशासनिक जटिलताएं भी कम होंगी।
यदि छत्तीसगढ़ सरकार इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है तो मध्य प्रदेश के पेंशनर्स को समय पर डीआर का लाभ मिल सकेगा। साथ ही कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (डीए) में वृद्धि होने पर पेंशनर्स को भी बिना देरी महंगाई राहत मिल जाएगी। फिलहाल अब इस पूरे मामले पर छत्तीसगढ़ सरकार के निर्णय का इंतजार है।