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इंदौर नगर निगम में सिक्योरिटी गार्ड के ठेके को लेकर कांग्रेस ने सवाल उठाए।
चिंटू चौकसे का आरोप, एक साल का ठेका करीब 12 साल तक जारी रहा।
आशापुरी सिक्योरिटी सर्विस को 6 करोड़ रुपये से अधिक भुगतान का दावा।
कांग्रेस ने 180 दिन की टेंडर वैधता और नई निविदा प्रक्रिया पर सवाल उठाए।
Indore Municipal Corporation Security Contract : इंदौर नगर निगम में सिक्योरिटी गार्ड की नियुक्ति और ठेका प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस ने कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया है। शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे ने आरोप लगाया कि साल 2014 में प्राणी संग्रहालय के लिए 1 साल की अवधि पर दिया गया ठेका नियमों के विपरीत करीब 12 साल तक जारी रखा गया। उनका दावा है कि इसी एजेंसी के माध्यम से नगर निगम के दूसरे विभागों और जोनल कार्यालयों में भी सुरक्षाकर्मियों की सेवाएं ली जाती रहीं।
चौकसे के मुताबिक, नगर निगम ने सुरक्षा गार्ड, गनमैन और सुपरवाइजर उपलब्ध कराने के लिए आशापुरी सिक्योरिटी सर्विस को ठेका दिया था। यह ठेका प्राणी संग्रहालय के लिए था। चौकसे का आरोप है कि निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद नए सिरे से टेंडर प्रक्रिया किए बिना एजेंसी से लगातार काम लिया जाता रहा। उन्होंने इस व्यवस्था की वैधता पर सवाल उठाए हैं।
इंदौर कांग्रेस अध्यक्ष के अनुसार, 25 अगस्त 2016 को किए गए अनुबंध में प्राणी संग्रहालय के लिए कम से कम 30 सुरक्षा गार्ड, चार गनमैन और दो सुपरवाइजर उपलब्ध कराने का उल्लेख था। उनका आरोप है कि इसी अनुबंध के आधार पर बाद में नगर निगम के अन्य विभागों, जोनल कार्यालयों और कार्यक्रमों में भी सुरक्षा कर्मियों की सेवाएं ली गईं। कांग्रेस ने सवाल किया है कि एक स्थान के लिए किए गए अनुबंध के तहत अन्य विभागों में सेवाएं किस प्रक्रिया के आधार पर ली गईं।
चौकसे ने दावा किया कि वर्ष 2016 से 2026 के बीच संबंधित एजेंसी को 6 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया। उनके मुताबिक, मूल कार्य और निर्धारित अवधि के हिसाब से भुगतान 28.35 लाख रुपये होना चाहिए था। कांग्रेस ने इन दोनों आंकड़ों के बीच के अंतर पर सवाल उठाए हैं।
इंदौर नगर निगम को लेकर चौकसे के मुताबिक, अनुबंध की शर्त क्रमांक 39 में निविदा की वैधता 180 दिन निर्धारित की गई थी। इसके बावजूद एजेंसी से लंबे समय तक काम लिए जाने पर उन्होंने सवाल उठाए। उन्होंने यह भी दावा किया कि एक अधिकारी ने नई टेंडर प्रक्रिया के जरिए एजेंसी नियुक्त करने के लिए नोटशीट लिखी थी, लेकिन उस पर अमल नहीं हुआ।