Indore Government School Condition: इंदौर में सरकारी स्कूलों की व्यवस्थाओं को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सरकार जहां सरकारी स्कूलों की सुविधाओं और भवनों पर लाखों रुपये खर्च करने का दावा करती है, वहीं शहर के लोधीपुरा स्थित स्कूल क्रमांक-54 की तस्वीरें इन दावों की हकीकत बयां करती नजर आ रही हैं।
लोधीपुरा के इस सरकारी स्कूल भवन की हालत इतनी जर्जर हो चुकी है कि स्कूल की छत और अन्य हिस्सों को बल्लियों के सहारे टिकाकर रखा गया है। स्कूल के कुछ कमरों की छत भी गिर चुकी है। इसके बावजूद यहां बच्चों की पढ़ाई जारी है। बारिश के मौसम में जर्जर कमरों के बीच बच्चे पढ़ने के लिए मजबूर हैं।
नवभारत की टीम जब मौके पर पहुंची तो स्कूल परिसर में जगह-जगह जर्जर भवन और बल्लियों का सहारा दिखाई दिया। स्कूल की स्थिति देखकर साफ है कि भवन लंबे समय से मरम्मत या पुनर्निर्माण की जरूरत में है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल बच्चों की सुरक्षा को लेकर खड़ा होता है।
बताया जा रहा है कि स्कूल के नए भवन के निर्माण के लिए प्रस्ताव भेजा जा चुका है, लेकिन प्रस्ताव और निर्माण के बीच बच्चों की पढ़ाई इसी जर्जर भवन में जारी है। बारिश के दौरान जर्जर छत और कमजोर ढांचे के बीच बच्चों और शिक्षकों की सुरक्षा चिंता का विषय बनी हुई है।
अब सवाल यह है कि जब स्कूल भवन की हालत इतनी खराब है तो बच्चों को यहां पढ़ाने की अनुमति क्यों दी जा रही है? किसी हादसे के बाद जिम्मेदारी तय करने के बजाय क्या जिला प्रशासन को पहले ही कोई सुरक्षित व्यवस्था नहीं करनी चाहिए?
सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी किसी अन्य स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की। ऐसे में लोधीपुरा स्कूल क्रमांक-54 की बदहाल तस्वीरें शिक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।