Indore CEC Big Statement: भारत निर्वाचन आयोग के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने इंदौर दौरे के दौरान मध्यप्रदेश में संपन्न हुए विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि राज्य ने मतदाता सूची के परिशोधन का कार्य पारदर्शी, व्यवस्थित और प्रभावी ढंग से पूरा कर पूरे देश के लिए एक आदर्श उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र नागरिक मतदाता सूची से वंचित न रहे और किसी अपात्र व्यक्ति का नाम सूची में शामिल न हो।
इंदौर में आयोजित संवाद कार्यक्रम में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने बूथ लेवल अधिकारियों से सीधे संवाद किया। उन्होंने कहा कि बीएलओ लोकतंत्र की रीढ़ हैं, क्योंकि वे घर-घर जाकर मतदाताओं का पंजीयन करते हैं, मतदाता सूची को अद्यतन रखते हैं और मृत, स्थानांतरित या डुप्लीकेट नामों को हटाने का कार्य करते हैं। उन्होंने विशेष रूप से दूरस्थ आदिवासी और वन क्षेत्रों में कार्य करने वाले बीएलओ के समर्पण की सराहना की।
ज्ञानेश कुमार ने कहा कि भारत की चुनाव प्रणाली विश्व की सबसे बड़ी, पारदर्शी और विश्वसनीय लोकतांत्रिक प्रक्रिया है। देश में लगभग 95 करोड़ मतदाता और 1.80 करोड़ चुनावकर्मी चुनाव प्रक्रिया में भाग लेते हैं। उन्होंने बताया कि मतदान से पहले मॉक पोल, पोलिंग एजेंटों की मौजूदगी और पारदर्शी मतगणना जैसी व्यवस्थाएं भारतीय चुनाव प्रणाली को विश्वसनीय बनाती हैं। उन्होंने चुनाव आयोग के एप को निर्वाचन आयोग का महत्वपूर्ण डिजिटल नवाचार बताया।
यह भी पढें:
कार्यक्रम के दौरान मध्यप्रदेश में संचालित एसआईआर अभियान की उपलब्धियों और नवाचारों पर आधारित विशेष कॉफी टेबल बुक का विमोचन किया गया। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी संजीव कुमार झा ने बताया कि अभियान की सफलता टीमवर्क, तकनीकी तैयारी और मैदानी कर्मचारियों की मेहनत का परिणाम है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि निर्वाचन आयोग ने बीएलओ के मानदेय को 6 हजार रुपये तक बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। कार्यक्रम के अंत में कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी शिवम वर्मा ने आभार व्यक्त किया।