Indore Bhagirathpura Water Crisis : इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई 36 मौतों के मामले में सोमवार को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में सुनवाई हुई। मामले से जुड़ी सात जनहित याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से जांच रिपोर्ट को ऑनलाइन उपलब्ध कराने की मांग रखी गई। कोर्ट ने करीब 600 पन्नों की जांच रिपोर्ट को हाईकोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड करने के निर्देश दिए हैं।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ताओं ने कोर्ट को बताया कि जांच रिपोर्ट ऑनलाइन उपलब्ध नहीं होने के कारण उसका अध्ययन करने और उसके आधार पर आगे के तर्क तैयार करने में परेशानी हो रही है। रिपोर्ट को सार्वजनिक करने और उसकी प्रति उपलब्ध कराने की मांग को लेकर एडवोकेट मनीष यादव और एडवोकेट रितेश इनाणी के माध्यम से आवेदन भी पेश किया गया था। सोमवार को इसी आवेदन पर सुनवाई हुई।
इंदौर हाईकोर्ट के निर्देश के बाद अब जांच रिपोर्ट को स्कैन कर हाईकोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा। माना जा रहा है कि एक-दो दिन में करीब 600 पन्नों की रिपोर्ट ऑनलाइन उपलब्ध हो सकती है। इसके बाद मामले से जुड़े अधिवक्ता रिपोर्ट को सीधे ऑनलाइन देखकर उसके बिंदुओं का अध्ययन कर सकेंगे। रिपोर्ट 25 अगस्त को हाईकोर्ट में सीलबंद लिफाफे में प्रस्तुत की गई थी।
भागीरथपुरा मामले की जांच के लिए हाईकोर्ट ने एक सदस्यीय जांच आयोग गठित किया था। सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति सुशील गुप्ता की अध्यक्षता वाले आयोग ने अपनी जांच पूरी कर रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत की। रिपोर्ट पेश होने के बाद इसे सार्वजनिक किए जाने पर आपत्ति जताई गई थी, जिसके बाद कोर्ट ने फिलहाल रिपोर्ट को सार्वजनिक करने पर रोक लगा दी थी। हालांकि, संबंधित अधिवक्ताओं को रजिस्ट्रार कार्यालय में रिपोर्ट का अवलोकन करने और जरूरी बिंदु नोट करने की अनुमति दी गई थी।
जांच आयोग ने भागीरथपुरा में जल प्रदूषण के कारण, दूषित पानी के स्रोत और उसकी प्रकृति, दूषित पानी से हुई बीमारी और मौतों की संख्या समेत कई बिंदुओं की जांच की। इसके अलावा घटना के लिए प्रथमदृष्टया जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की पहचान तथा प्रभावित परिवारों के मुआवजे से जुड़े पहलुओं की भी पड़ताल की गई। रिपोर्ट में पेयजल और ड्रेनेज व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर भी टिप्पणियां की गई हैं।
भागीरथपुरा दूषित पानी कांड सोमवार के आदेश के बाद अब रिपोर्ट ऑनलाइन उपलब्ध होने का रास्ता साफ हो गया है। रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद याचिकाकर्ताओं के वकील अगली सुनवाई में अपने तर्क रख सकेंगे। भागीरथपुरा दूषित पानी मामले में हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 5 अक्टूबर की तारीख तय की है।