Highlights:
लद्दाख-कारगिल बॉर्डर पर तैनात फौजी न्याय के लिए पहुंचा SP ऑफिस
साढ़े 10 लाख रुपए में खरीदे प्लॉट पर नहीं मिला कब्जा
चार साल पहले महाराजपुरा थाने में की थी शिकायत
जवान बोला- न्याय नहीं मिला तो बन जाऊंगा दूसरा पान सिंह तोमर
Gwalior Soldier Pan Singh Tomar Warning : देश की सरहद पर दुश्मनों से मुकाबला करने वाला एक जवान अपने ही शहर में इंसाफ के लिए संघर्ष कर रहा है। लद्दाख-कारगिल बॉर्डर पर तैनात फौजी रवि सिंह छुट्टी लेकर ग्वालियर पहुंचा और अपनी शिकायत लेकर पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंच गया।
जवान का आरोप है कि 5 साल पहले साढ़े 10 लाख रुपए में खरीदे गए प्लॉट पर उसे कब्जा नहीं मिल रहा है। लगातार शिकायतों के बावजूद सुनवाई नहीं होने से परेशान फौजी ने चेतावनी दी है कि न्याय नहीं मिला तो वह दूसरा पान सिंह तोमर बनने को मजबूर हो जाएगा।
ग्वालियर में जमीन पर कब्जे को लेकर फौजी रवि सिंह के मुताबिक, करीब 5 साल पहले उसने शताब्दीपुरम स्थित आर व्रत लैंड में 10 लाख 50 हजार रुपए देकर एक प्लॉट खरीदा था। यह सौदा उसने सत्येंद्र सिंह चौहान, उसके भांजे गोलू और रघुराज सिंह से किया था। जवान का कहना है कि पूरी रकम देने के बावजूद उसे जमीन का वास्तविक कब्जा नहीं मिल सका।
रवि सिंह का आरोप है कि जब वह अपने प्लॉट पर निर्माण कार्य शुरू कराने पहुंचा तो संबंधित लोगों ने उसे काम नहीं करने दिया। इसके बाद से वह लगातार प्लॉट पर अपना अधिकार पाने के लिए प्रयास कर रहा है। उसका कहना है कि जब भी वह सत्येंद्र सिंह चौहान से प्लॉट के संबंध में बात करने जाता है तो उसे टाल दिया जाता है।
फौजी का कहना है कि उसने इस मामले में करीब चार साल पहले महाराजपुरा थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद से वह लगातार पुलिस थाने के चक्कर लगा रहा है, लेकिन अब तक उसकी समस्या का समाधान नहीं हुआ। सीमा पर तैनाती के कारण वह हर समय शहर में भी मौजूद नहीं रह पाता। छुट्टी मिलने पर उसे अपने ही मामले की पैरवी के लिए अधिकारियों के दफ्तर पहुंचना पड़ता है।
ग्वालियर पुलिस से लगातार निराशा मिलने के बाद रवि सिंह ने अब एसपी कार्यालय पहुंचकर अपनी बात रखी है। उसने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर उसे न्याय नहीं मिला तो वह दूसरा पान सिंह तोमर बनने पर मजबूर हो जाएगा। उसके इस बयान के बाद मामला और गंभीर हो गया है।
मामले में CSP ग्वालियर मनीष यादव का कहना है कि दोनों पक्षों को बुलाकर पूछताछ की जाएगी। शिकायत और उपलब्ध तथ्यों की जांच के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।