टीआई दिलीप पुरी हत्याकांड की जांच में शराब तस्करी के रूट पर फोकस।
नेमावर-खातेगांव-कन्नौद होते हुए इंदौर तक पहुंचती थी शराब की खेप।
पुलिस को 700 किलोमीटर लंबे अंतरराज्यीय तस्करी नेटवर्क का पता चला।
पकड़े गए ट्रक में शराब की 1,400 पेटियां मिली थीं।
Dewas TI Dilip Puri Murder Investigation: देवास के खातेगांव थाना प्रभारी (टीआई) दिलीप पुरी की अवैध शराब ले जा रहे बेकाबू ट्रक से कुचलकर की गई निर्मम हत्या के मामले में पुलिस की जांच अब तस्करों के पूरे नेटवर्क और रूट पर केंद्रित हो गई है। देवास पुलिस के आला अधिकारी इस बात की गहनता से पड़ताल कर रहे हैं कि जिस मार्ग से शराब भरा ट्रक ले जाया जा रहा था, उस पर तस्करी की यह पहली खेप थी या इससे पहले भी इसी रास्ते से अवैध शराब के ट्रक गुजरते रहे हैं।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार,अवैध शराब से भरे ट्रक नेमावर से प्रवेश कर खातेगांव और कन्नौद होते हुए इंदौर पहुंचते थे, जहां से आगे आलीराजपुर तक का सफर तय किया जाता था। इस पूरे मामले में खातेगांव क्षेत्र के कांग्रेस नेता राहुल जायसवाल सहित आलीराजपुर के तस्करों की संलिप्तता सामने आई है। घटना को अंजाम देने वाला ट्रक ड्राइवर भी आलीराजपुर का ही निवासी है। इसके अलावा, अवैध शराब के काले कारोबार वाहन व्यवस्था में लिप्त एक अन्य आरोपी कैरम सिंह को भी पुलिस आलीराजपुर से गिरफ्तार कर चुकी है।
देवास के नवागत एसपी आदित्या मिश्रा के कड़े निर्देशों के तहत पूरी जांच को अंजाम दिया जा रहा है। यदि जांच में यह पुष्टि होती है कि नेमावर, खातेगांव और कन्नौद रूट पर घटना से पहले भी शराब तस्करों के ट्रकों की आवाजाही रही है, तो इन संबंधित थानों के थाना प्रभारियों पर सख्त कार्रवाई होना तय माना जा रहा है। इसके साथ ही, क्षेत्र के एसडीओपी आदित्य तिवारी की कार्यप्रणाली को लेकर भी प्रशासनिक हलकों में गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सूत्रों की माने तो एसडीओपी के तत्काल निर्देश पर ही टीआई सिविल ड्रेस में रात्रि गश्त पर पहुंचे थे, वही खुदको प्रत्यक्ष दर्शी बताने वाले खाते गांव टीआई काजी ने भी इस घटना से पहले कभी अवैध शराब परिवहन पर कोई कार्रवाई नहीं की है,जैसे काजी की पसंदिता थाना खातेगांव , कन्नौद ही रहा हैं अपनी पुलिस सेवा सबसे अधिक समय इसे क्षेत्र को दिया है तो शराब तस्करी से लेकर सभी अवैध परिवहन की गतिविधि उनसे अछूती नहीं होगी,
बता दें टीआई दिलीप पुरी हत्याकांड की जांच में अवैध शराब तस्करी के एक बड़े अंतरराज्यीय सिंडिकेट और 700 किलोमीटर लंबे रूट का खुलासा हुआ है। यह सिंडिकेट टिमरनी (हरदा) की लाइसेंसी शराब दुकानों से स्टॉक उठाकर फर्जी दस्तावेजों व बिना परमिट के देवास होकर गुजरात तक शराब पहुंचाता था।
सूत्रों के अनुसार, सिंडिकेट हरदा की टिमरनी स्थित सोडलपुर रोड दुकान से शराब लोड करता था। पकड़े गए ट्रक में 1,400 पेटियां शराब लदी थीं। एमपी से खरीदी गई शराब को गुजरात के अवैध बाजार में कई गुना दाम पर बेचा जाता था, जिससे प्रति ट्रक 8 से 10 लाख रुपए तक का मुनाफा होता था। पुलिस जांच से बचने के लिए तस्कर 3-लेयर सुरक्षा तंत्र और मुखबिरों के नेटवर्क का इस्तेमाल करते थे।
सिंडिकेट का मुख्य संचालक मोईन गुजरात निवासी अन्य राहुल जायसवाल को बताया जा रहा है, जो टिमरनी से शराब उठाने, रूट तय करने और हिसाब-किताब रखने का काम करता था। मुनाफे की पूरी रकम राहुल के पास जमा होती थी, जिसमें से राहुल, मनीष और मोहिन को 30-30% और लाइसेंसधारक पाटेन्द्र जायसवाल को 10% हिस्सा मिलता था।
मामले में अब तक 13 आरोपियों को हिरासत में लिया गया है और टिमरनी की तीन शराब दुकानों के लाइसेंस निलंबित कर सील कर दिया गया है। लापरवाही बरतने पर हरदा के सहायक जिला आबकारी अधिकारी अमरसिंह बघेल और दो आरक्षकों को निलंबित किया गया है।
मामले की जांच हर पहलू से की जा रही है। अवैध शराब का ट्रक इस रूट पर पहली बार आया था या इससे पहले भी आवाजाही रही है, पुलिस सभी एंगल पर पड़ताल कर रही है।