छतरपुर में नवागत कलेक्टर मृणाल मीणा ने मंगलवार को जिला पंचायत सभागृह में अपनी पहली जनसुनवाई की। इस दौरान उन्होंने 450 से अधिक आवेदकों की समस्याएं स्वयं सुनीं और संबंधित विभागों के अधिकारियों को आवेदनों का त्वरित एवं समयबद्ध निराकरण करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने अधिकारियों को स्पष्ट किया कि जनसुनवाई का उद्देश्य केवल आवेदन प्राप्त करना नहीं, बल्कि लोगों की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करना है।
जनसुनवाई में ग्राम पंचायत टटम स्थित पीएम श्री शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की छात्राएं और ग्रामीण अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे। उन्होंने स्कूल तक सड़क और पुलिया निर्माण के साथ विद्यालय में विद्युत व्यवस्था से जुड़ी समस्या को लेकर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। कलेक्टर मृणाल मीणा ने छात्राओं से मुलाकात कर उनकी समस्याएं गंभीरता से सुनीं। उन्होंने स्कूल में लाइट की समस्या को तत्काल दूर कराने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए। साथ ही सड़क और पुलिया निर्माण से जुड़ी समस्या के जल्द निराकरण का भरोसा भी छात्राओं और ग्रामीणों को दिलाया।
जनसुनवाई के दौरान जिला प्रशासन की संवेदनशीलता का एक उदाहरण उस समय देखने को मिला, जब एक दिव्यांग हितग्राही को ट्राई साइकिल प्रदान की गई। सहायता मिलने पर हितग्राही ने प्रशासन के प्रति आभार जताया। वहीं, सक्षम कैंटीन का संचालन करने वाले दिव्यांगजनों ने भी कलेक्टर मृणाल मीणा का स्वागत किया। जनसुनवाई के दौरान कलेक्टर ने आम लोगों की समस्याओं के साथ-साथ जरूरतमंद और दिव्यांग हितग्राहियों की समस्याओं को भी प्राथमिकता से सुना।
कलेक्टर मृणाल मीणा ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि दूर-दराज के ग्रामीणों को छोटी-छोटी समस्याओं के समाधान के लिए बार-बार जिला मुख्यालय के चक्कर न लगाने पड़ें। उन्होंने सभी अनुभागों के एसडीएम को अपने स्तर पर प्राप्त होने वाले आवेदनों का तत्काल प्रभाव से निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर जिन समस्याओं का समाधान संभव है, उन्हें अनावश्यक रूप से जिला स्तर तक लंबित नहीं रखा जाना चाहिए। इससे ग्रामीणों को राहत मिलने के साथ प्रशासनिक व्यवस्था भी अधिक प्रभावी होगी।
नवागत कलेक्टर की पहली जन सुनवाई से प्रशासन की कार्यशैली को लेकर स्पष्ट संदेश सामने आया है। कलेक्टर ने अधिकारियों को समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश देकर यह संकेत दिया कि जनसुनवाई केवल शिकायतें और आवेदन लेने की औपचारिक प्रक्रिया नहीं होगी। प्रशासन का जोर अब समस्याओं के निराकरण तक अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने पर रहेगा। 450 से अधिक आवेदकों की समस्याएं सुनने के दौरान कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों से कार्रवाई की जानकारी लेने और लंबित मामलों का समय पर समाधान करने पर भी जोर दिया। इससे आम लोगों को उम्मीद है कि जनसुनवाई के जरिए उनकी शिकायतों का वास्तविक समाधान सुनिश्चित होगा।