एमपी के सीएम मोहन यादव व खेत में कार्यरत किसान (फोटो-सोशल मीडिया) 
मध्य प्रदेश

शरबती गेहूं के लिए मशहूर एमपी में किसानों को बड़ा तोहफा, सरकारी खरीद 2600 रुपये प्रति क्विंटल

MSP Increase: मध्य प्रदेश में गेहूं का MSP बढ़कर 2600 रुपये हुआ, जिसमें 175 रुपये का बोनस शामिल है। खरीद 15 मार्च से 5 मई तक होगी, किसानों को ऑनलाइन स्लॉट बुक करना होगा।

सौरभ शर्मा

भोपाल: मध्य प्रदेश के किसानों के लिए खुशखबरी है। सरकार ने गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में बढ़ोतरी की घोषणा की है। पहले जहां किसानों को 2150 रुपये प्रति क्विंटल मिलते थे, वहीं अब यह बढ़कर 2600 रुपये हो गया है। इसमें 2425 रुपये का MSP और 175 रुपये का राज्य सरकार द्वारा दिया गया बोनस शामिल है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि सरकार किसानों को बिचौलियों से बचाने और उनकी आय बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। गेहूं की खरीद 15 मार्च से 5 मई तक होगी, और किसानों को ऑनलाइन स्लॉट बुक करना होगा। इस फैसले से एमपी के किसान उत्साहित हैं, क्योंकि उन्हें इस साल 25% ज्यादा दाम मिलेंगे।

मध्य प्रदेश सरकार ने 15 मार्च से 5 मई तक समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदने की घोषणा की है। इंदौर, उज्जैन, भोपाल और नर्मदापुरम में 15 मार्च से खरीद शुरू होगी, जबकि बाकी संभागों में 17 मार्च से यह प्रक्रिया शुरू होगी। किसानों को अपना गेहूं बेचने के लिए www.meuparjan.nic.in पर जाकर ऑनलाइन स्लॉट बुक करना होगा। सरकार ने यह कदम किसानों को बिचौलियों से बचाने और उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए उठाया है।

वादे और निर्देश

सीएम मोहन यादव ने गेहूं खरीद को लेकर मूल्य में वृद्धि करने की बात की है जिससे मध्यप्रदेश में गेहूं की बम्पर पैदावार की जा सके। सीएम बोले कि गेहूं खरीदी का हमारा संकल्प पत्र में जो वादा है, उसी के करीब पहुंचे हैं, इसलिए अबकी बार के गेहूं खरीदी के सभी खरीदी केंद्रों पर पूर्ण व्यवस्थाएं करने के निर्देश जारी दिए हैं। मध्यप्रदेश की अन्य खबरों के लिए यहां क्लिक करें

क्यों है खास म.प्र. का गेहूं

मध्य प्रदेश अपने उच्च गुणवत्ता वाले "शरबती गेहूं" के लिए जाना जाता है, जिसकी मांग मुंबई, पुणे, अहमदाबाद और हैदराबाद जैसे महानगरों में अधिक है। इसे "गोल्डेन" या "प्रीमियम गेहूं" के नाम से बेचा जाता है। एमपी के किसान अब वैज्ञानिक खेती अपना रहे हैं, जिससे उत्पादन की गुणवत्ता और भी बेहतर हो रही है। दिल्ली समेत उत्तर भारत के बाजारों में इसे "एमपी गेहूं" के नाम से जाना जाता है और इसकी कीमत भी अन्य राज्यों की तुलना में अधिक होती है। सरकार के इस फैसले से किसानों को न सिर्फ उनकी मेहनत का पूरा मूल्य मिलेगा, बल्कि एमपी का गेहूं उत्पादन भी नई ऊंचाइयों को छू सकता है।

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