Highlights:
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बीजेपी सरकार को कई मुद्दों पर घेरा।
निवेश के दावों पर सवाल उठाते हुए सेमीकंडक्टर परियोजनाओं और रोजगार का हिसाब मांगा।
शहरों के मास्टर प्लान में आम लोगों को दावे-आपत्तियों के लिए पर्याप्त समय देने की मांग की।
सरकारी खरीदी में कचरा गाड़ियों और LED बल्ब की कीमतों का हवाला देकर कथित भ्रष्टाचार पर सवाल उठाए।
SOR की दरों में बदलाव कर सरकारी खर्च और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने की मांग की।
Umang Singhar Corruption Allegations : मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कई मुद्दों को लेकर बीजेपी सरकार पर निशाना साधा। प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने लोकतंत्र, ईवीएम और SIR के जरिए मतदाता सूची के पुनरीक्षण, निवेश के दावों, नगरीय निकायों के मास्टर प्लान और सरकारी खरीदी में कथित भ्रष्टाचार पर सवाल उठाए। सिंघार ने आरोप लगाया कि सरकार कागजों पर निवेश की बात करती है, लेकिन जमीन पर रोजगार और विकास के नतीजे स्पष्ट नहीं हैं।
उमंग सिंघार ने आंदोलन कर रहे लोगों को भीड़तंत्र कहे जाने पर बीजेपी को घेरा। उन्होंने कहा कि आम नागरिक अपने अधिकारों और लोकतंत्र की रक्षा के लिए आवाज उठाते हैं। सिंघार ने सवाल किया कि यदि सरकार लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास करती है, तो बैलेट पेपर से चुनाव कराने और ईवीएम बंद करने के मुद्दे पर जवाब क्यों नहीं देती। उन्होंने SIR के तहत मतदाता सूची को लेकर भी सवाल उठाए और कांग्रेस को आम जनता की आवाज बताया।
सेमीकंडक्टर हब और निवेश प्रस्तावों को लेकर पूछे गए सवाल पर उमंग सिंघार ने मुख्यमंत्री के निवेश संबंधी दावों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के दौरों के बाद लाखों-करोड़ों रुपये के निवेश के दावे किए जाते हैं, लेकिन यह स्पष्ट होना चाहिए कि कितना निवेश वास्तव में जमीन पर उतरा है। उन्होंने पूछा कि सेमीकंडक्टर परियोजनाएं कब शुरू होंगी और उनसे कितने लोगों को रोजगार मिलेगा। सिंघार ने पोर्टलों पर पंजीकृत 25 लाख से अधिक युवाओं के रोजगार को लेकर भी सरकार से जवाब मांगा।
दिग्विजय सिंह की यात्रा में बच्चों से वोट चोरी के नारे लगवाए जाने को लेकर मानवाधिकार आयोग के नोटिस संबंधी सवाल पर सिंघार ने पूर्व मुख्यमंत्री का बचाव किया। उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह संवेदनशील व्यक्ति हैं और वे किसी बच्चे से ऐसे नारे नहीं लगवा सकते। सिंघार ने इसे बीजेपी का षड्यंत्र बताया।
शहरों के मास्टर प्लान पर आपत्तियां दर्ज कराने की समयसीमा को लेकर व्यापारियों के विरोध पर सिंघार ने कहा कि मास्टर प्लान आम लोगों की राय लेकर बनाया जाना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार दावे-आपत्तियां दर्ज कराने के लिए पर्याप्त समय क्यों नहीं दे रही है। सिंघार ने आरोप लगाया कि नगरीय निकायों के मास्टर प्लान में बड़ा घोटाला हो रहा है। उन्होंने किसानों, व्यापारियों और सिविल सोसाइटी को अपनी बात रखने के लिए पर्याप्त समय देने और खुले मंच पर चर्चा कराने की मांग की।
नगरीय निकायों में कचरा गाड़ियों की अलग-अलग कीमतों और अन्य खरीदी के मुद्दे पर सिंघार ने अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने एक जगह दो लाख और दूसरी जगह छह लाख रुपये में कचरा गाड़ी खरीदे जाने का जिक्र किया। साथ ही एक नगरपालिका में 200 LED बल्ब 60 लाख रुपये में खरीदे जाने का दावा किया। इन मामलों में उन्होंने कार्रवाई नहीं होने पर सवाल उठाया।
सिंघार ने कहा कि भ्रष्टाचार रोकने के लिए सबसे पहले सरकारी निर्माण और खरीदी में लागू शेड्यूल ऑफ रेट्स (SOR) की समीक्षा होनी चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि 60 हजार रुपये का टैंकर विधायक निधि से ढाई लाख रुपये में बनवाना पड़ता है, जबकि सवा लाख रुपये में होने वाली बोरिंग पर ढाई लाख रुपये खर्च करने पड़ते हैं। इसी तरह 50 से 60 हजार रुपये की डीपी के लिए दो से ढाई लाख रुपये देने पड़ते हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि SOR की दरें कम करने के लिए बैठक बुलाकर 24 घंटे में फैसला क्यों नहीं लिया जा सकता। उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि व्यवस्था में बदलाव किए बिना जनप्रतिनिधियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाना उचित नहीं है।