

Bhopal Corona Warriors Protest : कोरोना महामारी के सबसे कठिन दौर में अपनी जान जोखिम में डालकर प्रदेशवासियों की सेवा करने वाले मध्यप्रदेश के करीब 4 हजार से अधिक कोरोना योद्धा रोजगार की मांग को लेकर एक बार फिर आंदोलन कर रहे हैं।
बुधवार को कोरोना योद्धाओं के प्रतिनिधिमंडल ने भोपाल में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार से उनके आवास पर मुलाकात की। इस दौरान स्वास्थ्यकर्मियों ने अपनी समस्याएं रखीं और कोविड काल में सेवाएं देने के बाद रोजगार से वंचित किए जाने का मुद्दा उठाया। कोरोना योद्धा PPE किट पहनकर नेता प्रतिपक्ष से मिलने पहुंचे।
प्रतिनिधिमंडल ने उमंग सिंघार को बताया कि कोरोना संक्रमण के दौरान आयुष चिकित्सकों, स्टाफ नर्स, पैरामेडिकल स्टाफ, लैब टेक्नीशियन सहित अन्य अस्थायी स्वास्थ्यकर्मियों ने विपरीत परिस्थितियों में काम किया। संघ का कहना है कि इन स्वास्थ्यकर्मियों ने करीब दो साल तक कोविड सेंटर, फीवर क्लीनिक, सैंपलिंग और दूसरी स्वास्थ्य सेवाओं में अपनी सेवाएं दीं। संक्रमण का संकट कम होने के बाद 1 अप्रैल 2022 से उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं। इसके बाद से वे रोजगार के लिए संघर्ष कर रहे हैं और आर्थिक व पारिवारिक समस्याओं का सामना कर रहे हैं।
मुलाकात के बाद उमंग सिंघार ने कहा कि कोरोना योद्धाओं का सम्मान केवल प्रमाण पत्र और भाषणों से नहीं, बल्कि उनके अनुभव और योग्यता के आधार पर रोजगार देने से होगा। उन्होंने कहा कि जब प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था में मानव संसाधन की कमी है, तो कोरोना काल में काम कर चुके अनुभवी स्वास्थ्यकर्मियों की सेवाओं का उपयोग क्यों नहीं किया जा रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री से इन स्वास्थ्यकर्मियों को सरकारी सेवाओं में भर्ती करने पर तत्काल विचार करने की मांग की।
नेता प्रतिपक्ष ने कोरोना योद्धाओं को उनकी मांग विधानसभा में उठाने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि जिन स्वास्थ्यकर्मियों ने संकट के समय प्रदेशवासियों की जान बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डाली, उन्हें संकट खत्म होते ही बेरोजगारी के हवाले करना सरकार की कैसी कृतज्ञता है। सिंघार ने कहा कि इन स्वास्थ्यकर्मियों के पास कठिन परिस्थितियों में काम करने का अनुभव है और इस अनुभव का लाभ प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को मिल सकता है।
रोजगार की मांग को लेकर कोरोना योद्धाओं ने 5 अक्टूबर से भोपाल के नीलम पार्क में अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया है। उनका कहना है कि महामारी के दौरान जब स्वास्थ्य व्यवस्था को अतिरिक्त मानव संसाधन की जरूरत थी, तब उन्होंने संक्रमण के खतरे के बीच सेवाएं दीं। अब वे सरकार से दोबारा रोजगार, सेवा में समायोजन और कोविड काल के अनुभव के आधार पर रोजगार में प्राथमिकता देने की मांग कर रहे हैं।
कोरोना योद्धाओं का PPE किट पहनकर प्रदर्शन करना भी उनके आंदोलन का हिस्सा है। उनका कहना है कि यह उस दौर की याद दिलाने का प्रयास है, जब स्वास्थ्यकर्मी संक्रमण के खतरे के बीच मरीजों की सेवा कर रहे थे। कोरोना योद्धाओं ने सरकार से मांग की है कि उनके कोविड काल के अनुभव और योग्यता को ध्यान में रखते हुए रोजगार का रास्ता निकाला जाए। अब उनकी नजर सरकार की अगली कार्रवाई पर है।