MP SIR Controversy : चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR को लेकर कांग्रेस के आरोपों के बीच मध्यप्रदेश में सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने रविवार को भोपाल में प्रेस वार्ता कर कांग्रेस और राहुल गांधी पर निशाना साधा। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस के आरोपों को निराधार बताते हुए चुनाव आयोग पर सवाल उठाने की आलोचना की।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि SIR को लेकर कांग्रेस चुनाव आयोग पर आरोप लगा रही है, जबकि चुनाव आयोग फॉर्म-6 को लेकर स्थिति स्पष्ट कर चुका है। उन्होंने कांग्रेस पर राजनीतिक विफलता के कारण बौखलाहट में आरोप लगाने का आरोप लगाया। खंडेलवाल ने कहा कि कांग्रेस बिना दस्तावेजों के चुनाव आयोग पर आरोप लगा रही है। उन्होंने राहुल गांधी के पुराने बयानों का जिक्र करते हुए कहा कि राहुल गांधी विदेशों में भी भारत को बदनाम करने वाले बयान दे चुके हैं। उन्होंने कांग्रेस से अपने आरोपों को सत्यापित करने और प्रमाणित करने की चुनौती दी।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राहुल गांधी और कांग्रेस के आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि “नाच न जाने आंगन टेढ़ा” एक पुरानी कहावत है। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और कांग्रेस की कई पीढ़ियां लोकतांत्रिक व्यवस्था में सक्रिय रही हैं। सीएम ने कहा कि राहुल गांधी की भाषा और चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था को लेकर जिस तरह से बातें रखी गईं, वह उचित नहीं है। उनके मुताबिक चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट जैसी संस्थाओं के प्रति सम्मान लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि चुनाव आयोग ने फॉर्म-6 से जुड़े मामले में स्थिति स्पष्ट कर दी है। इसके बावजूद कांग्रेस की ओर से लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। मोहन यादव ने कहा कि “फॉर्म-6 के मामले में राहुल गांधी को माफी मांगनी चाहिए।” उन्होंने कांग्रेस पर सत्ता में रहने और सत्ता से बाहर होने पर अलग-अलग रुख अपनाने का आरोप भी लगाया। सीएम ने केरल और तमिलनाडु का उदाहरण देते हुए कांग्रेस के SIR को लेकर रुख पर सवाल खड़े किए।
मुख्यमंत्री ने राहुल गांधी के पुराने विवादों का जिक्र करते हुए कहा कि पहले भी उन्हें अपने एक बयान के मामले में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष माफी मांगनी पड़ी थी। उन्होंने कहा कि मौजूदा विवाद में भी राहुल गांधी को अपने आरोपों पर माफी मांगनी चाहिए। मोहन यादव ने कांग्रेस पर चुनाव आयोग और केंद्र सरकार के खिलाफ भ्रम फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कैबिनेट सेक्रेटरी को पत्र भेजने जैसी कार्रवाई भी राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश है।
कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन को लेकर मुख्यमंत्री ने इसे “और बड़ा दुर्भाग्य” बताया। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध किया जा सकता है, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं को लेकर इस तरह के आरोप लगाना उचित नहीं है।
प्रेस वार्ता के दौरान उज्जैन में अपने पैतृक मकान के हिस्से को सड़क चौड़ीकरण के लिए हटाए जाने के सवाल पर भी मुख्यमंत्री ने बात रखी। सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के तहत उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण का काम चल रहा है। इसी परियोजना की जद में मुख्यमंत्री मोहन यादव का पैतृक मकान भी आया है। रविवार को मुख्यमंत्री ने स्वयं गैंती चलाकर मकान के हिस्से को हटाने की शुरुआत की। रिपोर्टों के मुताबिक सड़क चौड़ीकरण के लिए परिवार ने मकान का हिस्सा हटाने और मुआवजा नहीं लेने की बात कही है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि उज्जैन में महाकाल लोक बनने के बाद श्रद्धालुओं की संख्या में बढ़ोतरी हुई है और सिंहस्थ के दौरान देश-दुनिया से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए शहर को तैयार करना जरूरी है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि जिस घर में उनका बचपन बीता, उसे हटाना आसान नहीं है, लेकिन शहर के विकास के लिए यह कदम उठाना पड़ा। सड़क चौड़ीकरण की मौजूदा योजना में अब्दालपुरा क्षेत्र में कई भवन प्रभावित हो रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार करीब 272 भवन इस कार्रवाई की जद में हैं, जिनमें मुख्यमंत्री का पैतृक मकान भी शामिल है।
SIR और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दे पर भाजपा और कांग्रेस के बीच टकराव लगातार बढ़ रहा है। भाजपा का कहना है कि चुनाव आयोग ने फॉर्म-6 और प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी है, जबकि विपक्षी दल चुनावी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहे हैं। इसी मुद्दे को लेकर दोनों दलों के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज है।