Sardar Sarovar Project Settlement : नर्मदा नदी पर बनी सरदार सरोवर परियोजना को लेकर मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान के बीच सालों से चला आ रहा वित्तीय विवाद अब खत्म हो गया है। नई दिल्ली में हुई अहम बैठक में चारों राज्यों ने वन-टाइम सेटलमेंट (OTS) समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की मौजूदगी रही।
हालांकि, इस समझौते का आर्थिक असर मध्य प्रदेश पर पड़ा है। राज्य सरकार जहां लंबे समय से मुआवजे की मांग कर रही थी, वहीं अंतिम समझौते के बाद अब मध्य प्रदेश को गुजरात सरकार को 550 करोड़ रुपये का भुगतान करना होगा।
सरदार सरोवर परियोजना से प्रभावित मध्य प्रदेश ने वर्ष 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून और वर्ष 2019-20 के बाजार भाव के आधार पर करीब 7,669 करोड़ रुपये के संशोधित मुआवजे का दावा किया था। वहीं गुजरात सरकार ने 2001 की दरों के आधार पर करीब 281 करोड़ रुपये देने की बात कही थी। इसके अलावा गुजरात ने बांध निर्माण और रख-रखाव में मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी को लेकर 5,516.50 करोड़ रुपये की देनदारी का दावा भी किया था।
सरदार सरोवर बांध की ऊंचाई बढ़ने के बाद मध्य प्रदेश में डूब क्षेत्र को लेकर विवाद और बढ़ गया था। साल 2002 में जहां राज्य के 178 गांवों की करीब 15,625.6 हेक्टेयर भूमि डूब क्षेत्र में थी, वहीं बांध की ऊंचाई बढ़ने के बाद यह आंकड़ा बढ़कर 192 गांवों की 20,822 हेक्टेयर भूमि तक पहुंच गया। इससे हजारों परिवारों के पुनर्वास और अतिरिक्त मुआवजे की मांग उठी थी। प्रभावित किसानों और परिवारों को लेकर राज्य सरकार लगातार अतिरिक्त भुगतान की मांग करती रही।
लंबी बातचीत के बाद हुए वन-टाइम सेटलमेंट के तहत परियोजना से जुड़े सभी पुराने वित्तीय दावों का निपटारा कर दिया गया है। समझौते को केंद्र सरकार ने राज्यों के बीच सहयोग और समन्वय का उदाहरण बताया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इसे सहकारी संघवाद की मिसाल बताते हुए कहा कि नर्मदा परियोजना से मिलने वाला लाभ किसी एक राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका फायदा देश के किसानों और नागरिकों को मिलता है। इस समझौते के बाद सरदार सरोवर परियोजना से जुड़े वर्षों पुराने आर्थिक विवाद पर विराम लग गया है।
इधर मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मध्य प्रदेश के अधिकारों की रक्षा करने के बजाय गुजरात सरकार के सामने समझौता कर लिया। सरदार सरोवर परियोजना के लिए प्रदेश ने अपनी जमीन, जंगल और लाखों लोगों के विस्थापन का बोझ उठाया, फिर भी सरकार अपने हक का मुआवजा लेने के बजाय गुजरात को 550 करोड़ रुपये देने पर सहमत हो गई।
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उन्होंने कहा कि मां नर्मदा का उद्गम और अधिकांश प्रवाह मध्य प्रदेश में होने के बावजूद प्रदेश के किसान और ग्रामीण आज भी सिंचाई और पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। यह फैसला मध्य प्रदेश के हितों से समझौता है और जनता सरकार से इसका जवाब मांग रही है।