मध्य प्रदेश बिजली खरीद नीति (सोर्स- सोशल मीडिया) 
भोपाल

MP में बिजली खरीद को लेकर होगी कैबिनेट की मंजूरी, सीएम की अनुमती के बाद लोगू होगी नीति; जानें क्या है नई नीति

Madhya Pradesh News: अब बिजली खरीद के दीर्घकालीन समझौतों के लिए कैबिनेट की मंजूरी लेना अनिवार्य होगा। पावर मैनेजमेंट कंपनी ने नई नीति को लेकर बड़ी घोषणा की है।

सजल रघुवंशी

Madhya Pradesh Power Management Company New Policy: मध्य प्रदेश पावर मैनेजमेंट कंपनी ने बिजली खरीद और आपूर्ति व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने का फैसला लिया है। मध्य प्रदेश में अब बिजली खरीद से जुड़े किसी भी दीर्घकालीन या मध्यकालीन समझौते को लागू करने से पहले राज्य कैबिनेट की मंजूरी लेना अनिवार्य होगा।

पावर मैनेजमेंट कंपनी की बोर्ड बैठक में इस संबंध में कई अहम निर्णय लिए गए। नए प्रावधान के तहत बिजली खरीद और सप्लाई से जुड़े सभी प्रमुख समझौते कैबिनेट की पूर्व स्वीकृति मिलने के बाद ही प्रभावी हो सकेंगे।

एनर्जी सरप्लस राज्यों में शामिल मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश के ऊर्जा विभाग और राज्य सरकार फिलहाल करीब 1,795 छोटे-बड़े, अल्पकालीन और दीर्घकालीन बिजली खरीद समझौतों के जरिए प्रदेश में लगातार बिजली आपूर्ति सुनिश्चित कर रही हैं। इन समझौतों के तहत राज्य के पास 26,012 मेगावाट की विद्युत क्षमता उपलब्ध है, जिसके कारण मध्य प्रदेश वर्तमान में ऊर्जा अधिशेष (एनर्जी सरप्लस) राज्यों में शामिल है।

इसलिए महत्वपूर्ण है यह नीति

इस नीति में संशोधन के पीछे मुख्य वजह यह बताई जा रही है कि दीर्घकालीन बिजली खरीद समझौते सरकार के लिए बड़े वित्तीय दायित्व तय करते हैं, जिनका असर कई वर्षों तक बना रहता है। ऐसे में यह आवश्यक माना गया कि हर समझौता राज्य के हितों के अनुरूप हो और प्रदेश की ऊर्जा सुरक्षा को दीर्घकाल तक मजबूत बनाए।

नीति के पीछे यह भी है बड़ा कारण

इस बदलाव के पीछे एक और बड़ी वजह यह भी बताई जा रही है कि नई तकनीकों के चलते अब बायोमास, सोलर बैटरी स्टोरेज, पंप हाइड्रो स्टोरेज और न्यूक्लियर एनर्जी जैसे स्रोतों से बिजली उत्पादन के कई नए प्रस्ताव सामने आ रहे हैं। ऐसे मामलों में राज्य सरकार और वित्त विभाग से विस्तृत परामर्श को आवश्यक माना जा रहा है, जिससे भविष्य के ऊर्जा समझौते बेहतर योजना और वित्तीय संतुलन के साथ किए जा सकें।

सीएम की मंजूरी के बाद लागू होगी नई नीति

अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई ने बताया कि ऊर्जा की वर्तमान उपलब्धता, भविष्य की जरूरतों और आपूर्ति व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए बोर्ड ने विस्तृत चर्चा के बाद यह फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि बोर्ड के इस प्रस्ताव को अब ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर के सामने प्रस्तुत किया जाएगा। इसके बाद मुख्य सचिव के माध्यम से मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव से मंजूरी ली जाएगी, जिसके पश्चात नई नीति लागू कर दी जाएगी।

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