Madhya Pradesh Water Shortage: मध्य प्रदेश में इस समय भीषण गर्मी और 'नौतपे' का डबल अटैक देखने को मिल रहा है। तापमान रिकॉर्ड तोड़ रहा है, लेकिन इससे भी बड़ी चिंता की बात यह है कि पूरे प्रदेश में जल संकट ने विकराल रूप ले लिया है। राज्य के छोटे-बड़े शहरों में पानी को लेकर त्राहिमाम मचा हुआ है।
इस बीच नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की एक चौंकाने वाली आंतरिक रिपोर्ट सामने आई है, जिसने सरकार और नगर निगमों के निर्बाध पानी सप्लाई के तमाम दावों की पूरी तरह पोल खोलकर रख दी है
विभाग की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश के कुल 413 नगरीय निकाय में से 162 निकाय में प्रतिदिन पानी की सप्लाई ठप है। 8 निकाय तो ऐसे हैं जहां लोगों को दो दिन छोड़कर तीसरे दिन पानी नसीब हो रहा है। जबलपुर संभाग के 2 निकायों में तो स्थिति इतनी भयावह है कि वहां तीन दिन में सिर्फ एक बार पानी की सप्लाई हो रही है। जबलपुर संभाग के कुल 56 निकायों में से केवल 46 में ही नियमित रूप से रोज पानी मिल पा रहा है।
प्रदेश की आर्थिक राजधानी माने जाने वाले इंदौर संभाग में हालात सबसे ज्यादा चिंताजनक हैं। यहां के 76 फीसदी शहरों में नगर निगम रोज पानी देने में नाकाम साबित हो रहा है। वहीं बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन संभाग के भी 64 फीसदी शहर इस समय बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
जल संकट का असर सिर्फ मालवा या महाकौशल तक सीमित नहीं है, बल्कि राजधानी भोपाल संभाग में भी दबाव तेजी से बढ़ा है। संभाग के 17 निकायों में एक दिन छोड़कर पानी दिया जा रहा है। वहीं, औद्योगिक क्षेत्र मंडीदीप और जावर-MPUDC में तो हालात और बदतर हैं, जहां दो-दो दिन छोड़कर जलप्रदाय किया जा रहा है।
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विशेषज्ञों का कहना है कि जल स्रोतों पर बढ़ते इस भारी दबाव के कारण आने वाले दिनों में यह संकट और भी ज्यादा खौफनाक रूप ले सकता है। यदि स्थानीय प्रशासन और राज्य सरकार ने समय रहते कोई ठोस और वैकल्पिक कदम (जैसे टैंकर व्यवस्था दुरुस्त करना, जल स्रोतों को पुनर्जीवित करना) नहीं उठाए, तो स्थिति पूरी तरह नियंत्रण से बाहर हो सकती है।