Madhya Pradesh Transfer Dispute: मध्यप्रदेश में तबादला सत्र समाप्त होने के बाद भी ट्रांसफर को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस बार मामला सामाजिक न्याय एवं उद्यानिकी मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा और उनके विभाग के सचिव जॉन किंग्सली (आईएएस) के बीच खुलकर सामने आया है। दोनों के बीच तबादला सूची को लेकर बढ़ा विवाद अब मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव तक पहुंच गया है। मामले को लेकर शासन स्तर पर गोपनीय जांच शुरू कर दी गई है।
मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा ने मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को भेजी नोटशीट में आरोप लगाया है कि उद्यानिकी विभाग में तबादलों के दौरान सचिव जॉन किंग्सली ने मनमाने तरीके से निर्णय लिए। उनका कहना है कि उन्होंने तीन विधायकों और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की अनुशंसा वाले नाम तबादलों के लिए भेजे थे, लेकिन उन्हें नजरअंदाज कर दिया गया। मंत्री का दावा है कि दो बार नोटशीट भेजने के बावजूद उन अधिकारियों के तबादले नहीं किए गए।
मंत्री ने आरोप लगाया कि सचिव ने केवल उन्हीं तबादलों को मंजूरी दी, जिनमें उनका व्यक्तिगत हित था, जबकि मंत्री की ओर से भेजी गई सूची को रोक दिया गया। उन्होंने इस पूरे मामले को प्रशासनिक प्रक्रिया की अनदेखी बताते हुए कार्रवाई की मांग की है।
वहीं, सचिव जॉन किंग्सली ने मंत्री के आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि मंत्री के साथ बैठक में जिन नामों पर सहमति बनी थी, बाद में ट्रांसफर के लिए अलग सूची भेजी गई। नियमों और पारदर्शिता को ध्यान में रखते हुए उस सूची पर कार्रवाई नहीं की गई। सचिव का कहना है कि सभी निर्णय नियमानुसार लिए गए हैं।
विवाद तब और गंभीर हो गया जब मंत्री ने अपनी शिकायत के साथ एक कथित व्हाट्सएप चैट का स्क्रीनशॉट भी संलग्न किया। मंत्री का दावा है कि चैट में पैसे की मांग किए जाने के संकेत हैं। हालांकि, इस आरोप की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
इस विवाद पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केके मिश्रा ने भी सोशल मीडिया के जरिए सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा कि "मध्यप्रदेश के सामाजिक न्याय एवं उद्यानिकी मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि सचिव जॉन किंग्सली ने अपने 'इंटरेस्ट' के तबादले किए और पैसे मांगे जाने से जुड़ी कथित व्हाट्सएप चैट भी भेजी है। रामराज्य, सुशासन, पारदर्शी प्रशासन, भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस और प्रशासनिक अराजकता जैसे दावों की परिभाषा अब खुद सरकार के एक मंत्री के लिखित आरोपों से सामने आ गई है।
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सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री मोहन यादव और मुख्य सचिव के संज्ञान में मामला आने के बाद शासन ने गोपनीय जांच शुरू कर दी है। सचिव से पूरे मामले पर लिखित जवाब भी मांगा गया है। अब सभी की नजर इस जांच पर टिकी है कि यह विवाद केवल प्रशासनिक मतभेद तक सीमित है या आरोपों में कोई तथ्य भी सामने आता है।