MP Rainfall Deficit: मध्य प्रदेश में मानसून की रफ्तार धीमी पड़ गई है। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में अब तक औसतन 16 इंच (407.2 मिमी) बारिश दर्ज की गई है, जबकि इस समय तक 19.5 इंच (495.2 मिमी) बारिश हो जानी चाहिए थी। यानी प्रदेश में करीब साढ़े तीन इंच कम बारिश हुई है और ओवरऑल वर्षा का आंकड़ा सामान्य से 18 प्रतिशत नीचे पहुंच गया है। प्रदेश के 55 में से 43 जिले अभी भी औसत बारिश के आंकड़े से पीछे चल रहे हैं।
आईएमडी भोपाल के मुताबिक पिछले एक सप्ताह के दौरान प्रदेश में कहीं भी भारी बारिश रिकॉर्ड नहीं हुई। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि पिछले तीन-चार दिनों में मानसूनी सिस्टम सक्रिय तो रहे, लेकिन उनकी तीव्रता कम होने के कारण व्यापक बारिश नहीं हो सकी। इसी वजह से प्रदेश में लगातार बारिश का औसत घटता जा रहा है और कई जिलों में सूखे जैसे हालात बनने लगे हैं।
बुधवार को प्रदेश के उत्तरी हिस्से में दो साइक्लोनिक सर्कुलेशन सक्रिय हुए हैं, जिनके कारण ग्वालियर-चंबल, सागर और रीवा संभाग के कई इलाकों में बारिश की गतिविधियां बढ़ी हैं। एक नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस भी सक्रिय हुआ है। इसके असर से अगले कुछ दिनों में प्रदेश में फिर तेज बारिश का दौर शुरू होने की संभावना है।
मौसम विभाग ने बुधवार को दतिया, भिंड, छतरपुर, पन्ना और सतना जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। इसके अलावा भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, अलीराजपुर, उज्जैन, देवास, रतलाम, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, जबलपुर, रीवा, सागर, शहडोल, उमरिया समेत 50 से अधिक जिलों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना जताई गई है।
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मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के पूर्वी हिस्से में सबसे ज्यादा 22 प्रतिशत कम बारिश हुई है। जबलपुर, शहडोल, रीवा और सागर संभाग का कोई भी जिला सामान्य बारिश के स्तर तक नहीं पहुंच पाया है। वहीं पश्चिमी मध्य प्रदेश में भी औसतन 15 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। हालांकि बड़वानी, भिंड, बुरहानपुर, देवास, इंदौर, खंडवा और खरगोन ऐसे जिले हैं, जहां सामान्य से अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई है।